केहू केहू के अइसन बनावेलें राम
कि देखि के भुला जाला सगरो काम
का धन लेके केहु इहां पर करी?
तू जेके हो जइबू उ तनि के चली।
तू जिनिगिया में जबसे हो आ गईलू
हमरे मनवां में हलचल मचा गइलू
रात अंजोरिया के जइसे चमके लागल
दिनवा चंदन के जैसे महके लागल।
तोहर होठवा के लाली गुलाबे नियर
तोहर अखिया मतावे शराबे नियर
जब किरिनिया के जइसे उतरेलू तू
लागे सरसों खिलल बाटे पियरे पियर।
हो नगिनिया के जइसे तोहर चाल बा
आ कारी बदरी के जैसे तोहर बाल बा
राह चलते मोसाफिर मोहा जालें हो
जे भी पहिले देखें अचकचा जालें हो।
कवनो लट्टू के जैसे सब नाचेलें हो
पियासल पानी खातिर ज्यों उदासेलें हो
जैसे फुलवन के रसवा के पिये खातिर
भंवरा दे देला जिनिगी जिनिगिये खातिर।
हम परेमी हो गईनी तोहर आजू से
लोगवा कहेला की गइनि हर काजू से
घर के रहिया भुला गइल तोहे देखि के
लोगवा पूछेला अइला तू का देखि के?
तोहर रहिया अगोरीले रोजो आ हम
मन के बतिया बतावे में लागे शरम
हम पर जाने का जादू हो जाला हो?
मुंह से निकले ना कवनो हृदय के वचन।
अब न पूछे केहु कि हमें का भइल
आ के मोहनी करेजवा में बसीये गइल
हो वत्सल कहलें पिरितिया के इहे धरम
मन के बतिया बतावे में कइसन शरम?
केहू केहू के…