Tagbhojpuri rachnaye

केहू केहू के

केहू केहू के अइसन बनावेलें रामओके देखिके भुला जाला सगरो काम। तू जिंदगिया में जब से आ गइलूहमरे मनवां में हलचल मचा गइलूरात चांदनी के जइसे चमके लागलदिनवां चंदन के जइसे महके लागल। तोहर होठवा के लाली गुलाबे नियरतोहर अंखिया मतावे शराबे नियरजब किरनियां के जइसे आवेलू तूलागे सरसों खिलल बा पीयरे पीयर। मनवां लट्टू के जैसे नाचेला होप्यासा पानी के देखि जैसे हरसेला हो।जइसे मधुआ के छत्ता में लिपटे खातिरभंवरा दे...

कारी बदरिया से…

अबकि गरमियां पड़ि गइल भारीबरखा के तनिको ना आइल फंकारीहो धाने के रोपवा जरि गइलें सारीपछुआ के जैसे कौनो भइल बा बेमारीकारी बदरिया से पूछीले हमहमरे गऊंआं में काहे बरसलू तू नाहिं? रोवेलें किसान भरि अंखिया में पानीखइहें पहुंनवां का, का खइहें जवारीबेटी के बियाह कइसे करइहें मुरारीखइहें सवंगवा का, का खइहें भिखारी?कारी बदरिया से पूछीले हमहमारे गऊंआं में काहे बरसलू तू नाहिं? चिरई-चुरुंग जाने कइसे जियेलें...

काहे करे मनवां उदास?

चार दिन चंदनियां के चहकल अंजोरियाचार दिन पीरितिया के बातचार दिन चंदरमा चमकलें अंगनवांचार दिन सजनवां के साथ। अगले ही दिनवां परदेश गईलें सजनासजनी के मनवां उदासअमवा के डलिया से पूछेली कोइलरिकाहे भइल बनवास? निंदिया न आवे रामा भूखिओ न लागेतनिको लागे ना पियासमनवां ही मनवां गोरी पूछेले देवताकईसन भइल मोरे साथ? ऊहां परदेसवा में सजना उदासलतरसे मिलनवां के आसमनवां के सब बाति पतिया में लिखलेंदेवें सजनियां के...

भोजपुरी

अब कहीं जड़ के सींचल जरूरी न बाआ भोजपुरी बोलल मजबूरी न बा।पहिन सूट बूटे में साहब निकललेंआधा उ हिंदी में उर्दू मिलवलेंअंग्रेजी के ऊपर से चिमकी लगकेवलेंआ तीनू मिला के पोजीशन बनवलेंआपन बोली बोलल केहू जानते न बाका ह भोजपुरी केहू समझते न बा।? लोग कहेलें चलs कुछु अच्छा सुनावsतू जिनीगिया पे हमरे कविता बनावsजल्दी से गावs तू ‘रिंकिया के पापा’एकरा आगे के हमरा ना तनिको बुझाताजवन एहमें मजा बा...

भोजपुरी गीत

पढ़ लिख के सुगना पिंजड़वा के तोड़ दजवने बा अन्हार के बंधन सगरो उजाड़ द। बाप के जिनगिया बीतल रोटी के जोगाड़ मेंबहुत रात माई सुतली मन के उजाड़ मेंसगरो आपन सुख भूललें फीस के जुटान मेंकईसे तू भुला गईल ई शहर के बाजार में? पढ़ लिख के सुगना पिंजड़वा के तोड़ दजवने बा अन्हार के बंधन सगरो उजाड़ द। जवन बा हथेली पे लिखल ऊहो बदल जालाकरम से त बंजर में भी अंकुर हो जालाहार माने ऊहो कवनो अदमी कहाला?उठs उठs मरम...

नाता टूटि गईल

जेकर गंऊंआ से नाता टूटि गईलओकर जिंदगी त कहेला बेकरवे बाsजे भी खेतवन में कबहूं उतरल नाहींओकर धरती पर आइल भारवे बाs। जब माटी के खुशबू समाइल नाहींत ओकर जिनगिए बेमरिए बाsजब जाने नाहिं कि गऊंआ का हत जियाने ऊ सगरो उमिरिए बाs। आई के बैठs कबो तू पिपरा तरेतबे जनबs कि कईसन बयरिये बाs?जे भी होरहा आ चटनी जानल नाहिंओके महुअर के पूछल भुलवने बाs। आम के बगईचा में खटिया बिछलआ दुपहरिये में ओकर टप टप चुअलकबो खिरिया...

माटी के लोगवा

माटी के लोगवा, रहि गईलें झोपड़िये मेंसेठ साहूकार लूटि गईलें रे बिदेशिया। खेतवा में सब दिन, खटेला जे मारे मारेकेहू ओके सुधियो ना लिहलें रे बिदेशिया। सबके अटरिया बनत गईलें दसो मालागरीबन के बतिया भूलईलें रे बिदेसिया। जेठ दुपहरिया में तियना बेचत रहेबुढिया नयन भरि लोर रे बिदेसिया। छोटे छोट लईका कागजे बीनत देखलीं होकहला पर केहू ना पतियाई रे बिदेसिया। राम के देसवा में भूखल नंगा लोग अबोगांधी के सपनवां का...

नेहवा लगा के(भजन)

नेहवा लगा के राम कहां चलि गइलsअयोध्या में आ के राम कहां चलि गइलs?हमके बोला के राम कहां चलि गइलsमर्यादा सिखा के राम कहां चलि गइलs? सुनिले बैकुंठे में तोहार ठेकान बासुनिले कि क्षीरसागर बहुते कमाल बामनई रूप आ के राम कहां चलि गइलsरहिया देखा के राम कहां चलि गइलs? इंहां बाट जोहत तोहर केतना जुग बीतलअवध राम बिन जैसे सोना भईल पीतलदरस देखा के राम कहां चलि गइलsहमके बोला के राम कहां चलि गइलs? सून सब मंदिर...

जिनिगिया (भजन)

सहेजत जिनिगिया थक गइल जान रेछूटि जाई एक दिन सब रिश्ता नातान रे?जरि जाई रसरी टूटी सब गुमान रेजाने कब शिव सुनब हमरो पुकार रे?देखीं कब आवेलs हमरे दुआर रे? जोहत तोहर बाट राम बीती गईल जिनगीघुमलीं बहुत मंदिर घाट पहिन के हम पियरीकरत भजनिया लेत तोहर नाम रेतोहारे से मर्यादा बा तोहरे से मान रेदेखीं कब आवेलs हमरे दुआर रे? जवानी के दिनवां में कहां होश होलाआंखी से सोझे राहि उल्टा बुझालामनई बुलबुला अइसन...

सैनिक गीत

जा रे चंदा, जा रे सूरजजा रे बदरा, जा रे बिजुरियाले आ सनेसवा, ले आ असीसवाकि कैसन बाड़ी हमार माई हो? माई के दिनवां अब कईसे कटेलासांस के उखड़ल कईसे दबेलादिन राति देखत होईहैं हमरे सुरतियामाई के मनवां त मोरे में बसेला। जा रे पवनवां, जा रे पुरवैयाजा रे अंजोरिया, जा रे बिजुरियाले जा परनमवां, ले आ असीसवाकि कैसन बाड़े हमार बाप हो? खेतिया में साथ उनके अब के खटेला?घरवा के काम अब कईसे डगरेलादुअरा पर के...

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Prof. Vachaspati Dwivedi teaches English in Sant Vinoba P.G. College, Deoria, U.P. India. He is a PhD from India's reknowned University BHU, Varanasi with a first class Post-graduate degree. His foreign tenures took him to teach in Haramaya University, Ethiopia and Al Fateh University Tripoli, Libya. He has 8 books to his credit and more than 30 papers published in different journals, both national and international. In 2012 he presented a paper on Folk Literature in Bangkok International Conference , Thailand and in Feb 2019 he went to Singapore to present a paper on Hijra Autobiographies. He edits an international online journal 'Critical Paradigm' which can be accessed at www.criticalparadigmjournal.com.
He is an acclaimed poet of Hindi as well and has published three poetry collections namely 'Ret ke Sahar Me', 'Phir Khilenge Fool Priytam' and 'Jindagi Jo Shayari Hoti'. Recently his story collection 'Apna Apna Moksh' (2024) has been published worldwide and is available on Amazon and Flipkart.