जे लगे आके बैठल करेलाउहे मनवां दुखावल करेलाहम ना जनलीं कि लोगवा एहींगाआपन चेहरा छुपावल करेलाजे लगे आके बैठल करेला… मन के बतिया केहू भी न जानेचाहे सीधा हो चाहे सयानेलोग मितवा बने के बहानेसबके उल्लू बनावल करेलाजे लगे आके बैठल करेला… खूब घन आपन चाहे लुटावsचाहे सबके तू आपन बनावsतनी बचके चलs इ जमानाभेदी लंका ढहावल करेलाजे लगे आके बैठल करेला…। चाहे केतनो बचाके चलs तूलोगवा ठोकर लगावल...
केहू केहू के…
केहू केहू के अइसन बनावेलें रामकि देखि के भुला जाला सगरो कामका धन लेके केहु इहां पर करी?तू जेके हो जइबू उ तनि के चली। तू जिनिगिया में जबसे हो आ गईलूहमरे मनवां में हलचल मचा गइलूरात अंजोरिया के जइसे चमके लागलदिनवा चंदन के जैसे महके लागल। तोहर होठवा के लाली गुलाबे नियरतोहर अखिया मतावे शराबे नियरजब किरिनिया के जइसे उतरेलू तूलागे सरसों खिलल बाटे पियरे पियर। हो नगिनिया के जइसे तोहर चाल बाआ कारी बदरी के...
अईसन बुझाला (जयमाला गीत)
आवs मोरी सजनी हो, मोरी दुल्हनियांमाथे पे सोभेला लाल तोहर बिंदियाहो चलत में बाजेला छम पैजनियांअजुए अंजोर भईल मोर जिनिगिया?हो तोहके बनाके दुल्हनियां…सजाईं जिनगी, अईसन बुझाला। सपने में आवेलु तू हर रोज ही हमरेअईसन लागेला सब दुनिया बा तोहमेंमीठ मीठ बात तोहर मन में समालाहो तोहरे गले में हम डालि वरमाला…सजाईं जिनगी, अईसन बुझाला। आवs आवs सजना, मोरे सुगनवांसोहन लागे हो तोहर बरतियानाचेलें...
गंउआं छीना गइल हमसे हो भाई
देश विदेश के महंगा नोकरिया होगंउआं छोड़ा गइल हमसे हो भाईछुटिया बीतत तनिको देर ना लागेदुनिया बिला गइल सगरी हो माई। माई बाप बूढ़ अगोरेलें रहियादुखवा से तनिको हो उबरे न पाईंकेहू न बूझेला मनवां के बतियाकईसे बताईं आ का समझाईं? दूर भईलें सब खेतवा खलिहनवांबचपन के दिनवां जे बहुते रुलाईदूर भईलें सगरो बाग बगइचा होजहवां दुपहरिया हम जाके बिताईं। छोडि नौकरिया गांवें चली जाईं तकईसे सपनवां उ पूरा हो पाई?फूस के...
तुम हे वसंत फिर आ जाते…
तुम हे वसंत फिर आ जाते, तुम आ जातेनई नवेली कलियों से मेरा जीवन महका जातेउनको भी यहां बुला जाते, मेरा मन भी हर्षा जातेफिर से प्रेम निभाने के कुछ नूतन नियम बता जाते!तुम आ जाते…तुम हे वसंत फिर आ जाते… क्या दिन थे अपने यौवन के, वे पल थे कितने मनभावनहम घूमा करते तेरे संग, में, इस उपवन या उस उपवनवो गीतों छंदों की बातें, वो गजल सुनाने के मौसममन ही मन जोड़ा करते तुमसे जीवन के सब बंधन।तुम आ...
पीपल जाते कह गया
पीपल जाते कह गया, मत करना अब बातकितने दिवस आए नहीं, तुम भी तो मेरे पास? भूल गए मैना गौरैया, भूले शुक चितचोरभूल गई है कोयल भी, भूल गए सब मोर। पनघट मुझसे रूठ गया, लेता है मुंह को फेरनदिया भी अब पास नहीं, मांझी न गाता टेर। गोधूली भी स्वप्न हो गईं, दिखे न कोई ढोरचरवाहे अब भूल गए, आना ही इस ओर। भूल गए हैं मर्कट भी, करते थे जो किल्लोलभूल गईं हैं गिलहरियां, जो दौड़ा करतीं रोज। मैं साथी तेरे पुरखों का...
वक्त
मुश्किलों का दौर भी आखिर तो गुजर जाएगावक्त से भागकर कोई शख्स किधर जाएगा? धूप हो, छांव हो या तूफान सफर में आएखत्म हो जाएगा जो हालात से डर जाएगा। राह चलते हुए कदमों की थकन भूल गएजूझने से ही तो सीरत पे असर आएगा। अंधेरी रात में चरागों का असर देखो तोतमस के बढ़ते ही वो और निखर जाएगा। जगनुओं ने भी अपने नाम को जिंदा रखाबन गए रौशनी, पैग़ाम को जिंदा रखा। बहुत दिन बैठा तो लोहे की चमक जाती रहीमुश्किलें ना...
प्यास
कितने बरस कितने ही दिन और कितनी रातें बीत गईंफिर भी अपनी प्यास मिटी ना, ना तृष्णा पर जीत हुई। अब भी आंखों में इंद्रधनुष है अब भी सपने देख रहाअब भी प्यालों की आस लगी है नव मधुशालाएं खोज रहा। हर मधुशाला बारी बारी रोज ही जाकर पूछता हैमोक्ष जहां पीने से मिलता वो मधुशालाएं कैसी हैं? अब तक जिसका स्वाद न पाया वह रस भी तो पीलूं मैंदे दो मुझको ऐसा प्याला जिसको पी सब भूलूं मैं। सुख औ दुख के अंतराल में भटका...
बरगद
यहीं एक बरगद हुआ करता था, पहलेहम उसकी छांव में खेले थे, पहले। गर्मियों में तो यहां घर का वहम होता थाघर यहां कम ही थे वैसे भी, पहले। पक्षियों ने भी यहीं नीड़ का निर्माण कियायहीं फल भी गिरा करते थे, पहले। हम कितने खुश थे जरा धूप और छाया मेंलोग भी कितने जुड़े थे, पहले। जड़ें ऊपर से नीचे को लटक आती थींवहीं वृक्ष भी बन जाती थीं, पहले। कैसा बदला ये जमाना कि बरगद न रहाजाने किस दर्द से गुजरा था, पहले।...
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूं
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूंडालियों पर झूल जाना चाहता हूंउम्र मेरी बस जरा सी ही सहीमैं दिलों में घर बनाना चाहता हूं। भ्रमर जैसे खोजता हूं उस मधु कोप्राप्ति जिसकी मोक्ष का पर्याय होकागज़ी इस पैरहन का क्या भरोसामैं हरेक लम्हे को जीना चाहता हूं। मधु जो अलग हो सारे मधु सेमैं होठों से लगाना चाहता हूंजो भर दे तृप्ति से मेरे हृदय कोआनंद में जीवन बिताना चाहता हूं। दृश्य हो, नृत्य भी हो, गान भी होक्षितिज...