पीपल जाते कह गया, मुझसे अपनी बातकोई भी बैठा नहीं, इन दिवसों मेरी छाँव? भूल गए मैना गौरैया, खो गया कलरव शोरभूल गई काली कोयल भी, भूल गए सब मोर? पनघट भी है रूठ गया, लेता मुंह को फेरनदिया भी पास नहीं, मांझी न गाता टेर। गोधूली भी स्वप्न हो गईं, दिखे न कोई ढोरचरवाहे अब भूल गए हैं आना ही इस ओर। भूल गए हैं मर्कट भी, उछलें डाली पर जोरभूले सारे विहग वृन्द भी जो थे फल के चोर? मुझसे आकर मिलने वाली पीढ़ी है...
केहू केहू के
केहू केहू के अइसन बनावेलें रामओके देखिके भुला जाला सगरो काम। तू जिंदगिया में जब से आ गइलूहमरे मनवां में हलचल मचा गइलूरात चांदनी के जइसे चमके लागलदिनवां चंदन के जइसे महके लागल। तोहर होठवा के लाली गुलाबे नियरतोहर अंखिया मतावे शराबे नियरजब किरनियां के जइसे आवेलू तूलागे सरसों खिलल बा पीयरे पीयर। मनवां लट्टू के जैसे नाचेला होप्यासा पानी के देखि जैसे हरसेला हो।जइसे मधुआ के छत्ता में लिपटे खातिरभंवरा दे...
कारी बदरिया से…
अबकि गरमियां पड़ि गइल भारीबरखा के तनिको ना आइल फंकारीहो धाने के रोपवा जरि गइलें सारीपछुआ के जैसे कौनो भइल बा बेमारीकारी बदरिया से पूछीले हमहमरे गऊंआं में काहे बरसलू तू नाहिं? रोवेलें किसान भरि अंखिया में पानीखइहें पहुंनवां का, का खइहें जवारीबेटी के बियाह कइसे करइहें मुरारीखइहें सवंगवा का, का खइहें भिखारी?कारी बदरिया से पूछीले हमहमारे गऊंआं में काहे बरसलू तू नाहिं? चिरई-चुरुंग जाने कइसे जियेलें...
वक्त
मुश्किलों का दौर भी आखिर तो गुजर जाएगावक्त से भागकर कोई शख्स किधर जाएगा? धूप हो, छांव हो या तूफान सफर में आएखत्म हो जाएगा जो हालात से डर जाएगा। राह चलते हुए कदमों की थकन भूल गएजूझने से ही तो सीरत पे असर आएगा। अंधेरी रात में चरागों का असर देखो तोतमस के बढ़ते ही वो और निखर जाएगा। जगनुओं ने भी अपने नाम को जिंदा रखाबन गए रौशनी, पैग़ाम को जिंदा रखा। बहुत दिन बैठा तो लोहे की चमक जाती रहीमुश्किलें ना...
प्यास
कितने बरस कितने ही दिन और कितनी रातें बीत गईंफिर भी अपनी प्यास मिटी ना, ना तृष्णा पर जीत हुई। अब भी आंखों में इंद्रधनुष है अब भी सपने देख रहाअब भी प्यालों की आस लगी है नव मधुशालाएं खोज रहा। हर मधुशाला बारी बारी रोज ही जाकर पूछता हैमोक्ष जहां पीने से मिलता वो मधुशालाएं कैसी हैं? अब तक जिसका स्वाद न पाया वह रस भी तो पीलूं मैंदे दो मुझको ऐसा प्याला जिसको पी सब भूलूं मैं। सुख औ दुख के अंतराल में भटका...
बरगद
यहीं एक बरगद हुआ करता था, पहलेहम उसकी छांव में खेले थे, पहले। गर्मियों में तो यहां घर का वहम होता थाघर यहां कम ही थे वैसे भी, पहले। पक्षियों ने भी यहीं नीड़ का निर्माण कियायहीं फल भी गिरा करते थे, पहले। हम कितने खुश थे जरा धूप और छाया मेंलोग भी कितने जुड़े थे, पहले। जड़ें ऊपर से नीचे को लटक आती थींवहीं वृक्ष भी बन जाती थीं, पहले। कैसा बदला ये जमाना कि बरगद न रहाजाने किस दर्द से गुजरा था, पहले।...
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूं
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूंडालियों पर झूल जाना चाहता हूंउम्र मेरी बस जरा सी ही सहीमैं दिलों में घर बनाना चाहता हूं। भ्रमर जैसे खोजता हूं उस मधु कोप्राप्ति जिसकी मोक्ष का पर्याय होकागज़ी इस पैरहन का क्या भरोसामैं हरेक लम्हे को जीना चाहता हूं। मधु जो अलग हो सारे मधु सेमैं होठों से लगाना चाहता हूंजो भर दे तृप्ति से मेरे हृदय कोआनंद में जीवन बिताना चाहता हूं। दृश्य हो, नृत्य भी हो, गान भी होक्षितिज...
अक्सर भूल जाता हूं
क्या खूब झगड़ा आजकल सजदाघरों का हैमैं जब भी सिर झुकाता हूं ये अंतर भूल जाता हूं। मुझे मस्जिद कलीसे भी किसी मंदिर से लगते हैंमैं उनको देखकर खुद अपना मज़हब भूल जाता हूं? है मालिक कौन दुनिया का भला मैं पूछता क्यों हूं?कि यह भी उसकी मर्जी है मैं अक्सर भूल जाता हूं। खड़ा मैं जब भी होता हूं किसी सच के शिवाले मेंलगे किस रंग के झंडे मै अक्सर भूल जाता हूं। सियासत जो भी कहती हो, हूं मैं भी आदमी आखिरहिदायत...
जब चलते चलते रात हुई
जब चलते-चलते रात हुईउन छालों से कुछ बात हुईमंजिल का कोई पता नहींफिर आंखों से बरसात हुईथक कर बैठा था मनुज मौनजुगनू बोला रोता है कौन?आंसू क्यों व्यर्थ बहाते होबाधाओं से घबराते हो? आओ मैं तेरी थकन हरूंकुछ अपने मन की बात कहूंरातों के घने अंधेरे मेंजब जलता कोई दीप नहींपदचिन्हों की हर रेख मौनकिससे पूछेगा राह कौन?जब तारों पर छाते बादलतूफान हो गया हो पागलतब भी आशाएं होती हैंकुछ परिभाषाएं होती हैं। जो...
चराग़
जब एक चराग़ बुझ गया तूफान हंस पड़ाउसने समझा अब कहीं चराग़ नहीं। जगनुओं को देकर कसम चराग़ों नेअंधेरी राह पर फिर से उजाले कर दिए। वो उजालों का निगहबान होता जाएगाजो अंधेरों में पशेमान होता जाएगा। बस एक ज़ुबान की चाहत है इन उजालों कोअंधेरे देर तक मेहमान नहीं होते हैं। थर थर कांप रही है लौ, पर जिंदा हैदेर तक वो भी अंधेरों का भरम रखती है। तुम चराग़ न सही, जुगनू ही चलो हो जानाजिसमें न तेल है, न दिया है, न...