तुम हे वसंत फिर आ जाते, तुम आ जातेनई नवेली कलियों से मेरा जीवन महका जातेउनको भी यहां बुला जाते, मेरा मन भी हर्षा जातेफिर से प्रेम निभाने के कुछ नूतन नियम बता जाते!तुम आ जाते…तुम हे वसंत फिर आ जाते… क्या दिन थे अपने यौवन के, वे पल थे कितने मनभावनहम घूमा करते तेरे संग, में, इस उपवन या उस उपवनवो गीतों छंदों की बातें, वो गजल सुनाने के मौसममन ही मन जोड़ा करते तुमसे जीवन के सब बंधन।तुम आ...
पीपल जाते कह गया
पीपल जाते कह गया, मत करना अब बातकितने दिवस आए नहीं, तुम भी तो मेरे पास? भूल गए मैना गौरैया, भूले शुक चितचोरभूल गई है कोयल भी, भूल गए सब मोर। पनघट मुझसे रूठ गया, लेता है मुंह को फेरनदिया भी अब पास नहीं, मांझी न गाता टेर। गोधूली भी स्वप्न हो गईं, दिखे न कोई ढोरचरवाहे अब भूल गए, आना ही इस ओर। भूल गए हैं मर्कट भी, करते थे जो किल्लोलभूल गईं हैं गिलहरियां, जो दौड़ा करतीं रोज। मैं साथी तेरे पुरखों का...
चापलूसी की तमन्ना
चापलूसी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है जोर कितना साहिबे-मसनद में है? हमने देखा उनके पैरों में हैं छाले हो गएहम तुरत ही आ के उनकी मरहम पट्टी कर गए। हमने देखा उनके घर में सब्जी की किल्लत हुईअगले पल ही सब्जीमंडी अपनी भी आदत हुई। उनके बालों में यकायक जो सफेदी आ गईहमको भी सहसा सफेदी की वो लज्जत भा गई। हम तो चंपी करने में भी खुद बड़े मशहूर हैंदिन रहे या रात को ही साहब बुलाते खूब हैं। उनका मुखड़ा...
कोई गज़ल तो लिख
उन वंचितों पर भी जरा कोई गज़ल तो लिखझोपड़ी का हक जो मारे उस महल पर लिख। लबों, जुल्फों, सागरों पर शायरी आसान हैज़ुल्मतों के दौर पर भी एक बहर तो लिख। भूखे नंगे लोग किस उम्मीद से सजदा करेंअदालतें कानून हों गर बेअसर तो लिख। चांदनी पर शेर लिख जलती दुपहरी भूलतेसपने जहां पूरे न हों ऐसे बसर पर लिख। प्याला लिए साकी के साए में थिरकना चाहनाये भी भला कोई काम है अच्छा अगर तो लिख? दूसरे की आंख में आंसू का कतरा...
प्यास
कितने बरस कितने ही दिन और कितनी रातें बीत गईंफिर भी अपनी प्यास मिटी ना, ना तृष्णा पर जीत हुई। अब भी आंखों में इंद्रधनुष है अब भी सपने देख रहाअब भी प्यालों की आस लगी है नव मधुशालाएं खोज रहा। हर मधुशाला बारी बारी रोज ही जाकर पूछता हैमोक्ष जहां पीने से मिलता वो मधुशालाएं कैसी हैं? अब तक जिसका स्वाद न पाया वह रस भी तो पीलूं मैंदे दो मुझको ऐसा प्याला जिसको पी सब भूलूं मैं। सुख औ दुख के अंतराल में भटका...
बरगद
यहीं एक बरगद हुआ करता था, पहलेहम उसकी छांव में खेले थे, पहले। गर्मियों में तो यहां घर का वहम होता थाघर यहां कम ही थे वैसे भी, पहले। पक्षियों ने भी यहीं नीड़ का निर्माण कियायहीं फल भी गिरा करते थे, पहले। हम कितने खुश थे जरा धूप और छाया मेंलोग भी कितने जुड़े थे, पहले। जड़ें ऊपर से नीचे को लटक आती थींवहीं वृक्ष भी बन जाती थीं, पहले। कैसा बदला ये जमाना कि बरगद न रहाजाने किस दर्द से गुजरा था, पहले।...
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूं
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूंडालियों पर झूल जाना चाहता हूंउम्र मेरी बस जरा सी ही सहीमैं दिलों में घर बनाना चाहता हूं। भ्रमर जैसे खोजता हूं उस मधु कोप्राप्ति जिसकी मोक्ष का पर्याय होकागज़ी इस पैरहन का क्या भरोसामैं हरेक लम्हे को जीना चाहता हूं। मधु जो अलग हो सारे मधु सेमैं होठों से लगाना चाहता हूंजो भर दे तृप्ति से मेरे हृदय कोआनंद में जीवन बिताना चाहता हूं। दृश्य हो, नृत्य भी हो, गान भी होक्षितिज...
जब चलते चलते रात हुई
जब चलते-चलते रात हुईउन छालों से कुछ बात हुईमंजिल का कोई पता नहींफिर आंखों से बरसात हुईथक कर बैठा था मनुज मौनजुगनू बोला रोता है कौन?आंसू क्यों व्यर्थ बहाते होबाधाओं से घबराते हो? आओ मैं तेरी थकन हरूंकुछ अपने मन की बात कहूंरातों के घने अंधेरे मेंजब जलता कोई दीप नहींपदचिन्हों की हर रेख मौनकिससे पूछेगा राह कौन?जब तारों पर छाते बादलतूफान हो गया हो पागलतब भी आशाएं होती हैंकुछ परिभाषाएं होती हैं। जो...
घरौंदा
लोग आते रहेंगे, लोग जाते रहेंगेहम कहानी खुद अपनी बनाते रहेंगेबहारों का मौसम या पतझड़ कोईहम तुझपर दिलो-जां लुटाते रहेंगे। तुम जो चलकर थकोगे कभी राह परकांधे थपकी हम आकर लगाते रहेंगेइंद्रधनुषों में जैसे खिले सात रंगतुझको सपनों में आकर जगाते रहेंगे। हमने यहां कुछ लकीरों को खींचालकीरों से कितनों को रस्ता मिलाकभी रश्मियों से कभी जगनुओं सेहम तेरी राह रौशन बनाते रहेंगे। हमने गमों के सभी रंग देखेबहुत से...
कोहरा
मानता हूं कि अब कोहरा घना हैमगर चुप बैठने से क्या बना है? घर से निकल कुछ कर के देखोअंगीठी सेकने से क्या बना है? महज संघर्ष ही है राह वत्सलचुपचाप बैठे सोचने से क्या बना है? लड़ेंगे जूझेंगे कठिनाइयों सेसिर्फ अंगड़ाईयों से क्या बना है? जो कहते हैं कमजोर तुमकोउनके कहने भर से क्या बना है? बेमन हो के तुम कुछ भी न करनाकर्म को त्यागने से क्या बना है? अमावस भी तो अक्सर जगनुओं से हारती हैनियति से हार को...