पीपल जाते कह गया, मुझसे अपनी बातकोई भी बैठा नहीं, इन दिवसों मेरी छाँव? भूल गए मैना गौरैया, खो गया कलरव शोरभूल गई काली कोयल भी, भूल गए सब मोर? पनघट भी है रूठ गया, लेता मुंह को फेरनदिया भी पास नहीं, मांझी न गाता टेर। गोधूली भी स्वप्न हो गईं, दिखे न कोई ढोरचरवाहे अब भूल गए हैं आना ही इस ओर। भूल गए हैं मर्कट भी, उछलें डाली पर जोरभूले सारे विहग वृन्द भी जो थे फल के चोर? मुझसे आकर मिलने वाली पीढ़ी है...
कारी बदरिया से…
अबकि गरमियां पड़ि गइल भारीबरखा के तनिको ना आइल फंकारीहो धाने के रोपवा जरि गइलें सारीपछुआ के जैसे कौनो भइल बा बेमारीकारी बदरिया से पूछीले हमहमरे गऊंआं में काहे बरसलू तू नाहिं? रोवेलें किसान भरि अंखिया में पानीखइहें पहुंनवां का, का खइहें जवारीबेटी के बियाह कइसे करइहें मुरारीखइहें सवंगवा का, का खइहें भिखारी?कारी बदरिया से पूछीले हमहमारे गऊंआं में काहे बरसलू तू नाहिं? चिरई-चुरुंग जाने कइसे जियेलें...
वक्त
मुश्किलों का दौर भी आखिर तो गुजर जाएगावक्त से भागकर कोई शख्स किधर जाएगा? धूप हो, छांव हो या तूफान सफर में आएखत्म हो जाएगा जो हालात से डर जाएगा। राह चलते हुए कदमों की थकन भूल गएजूझने से ही तो सीरत पे असर आएगा। अंधेरी रात में चरागों का असर देखो तोतमस के बढ़ते ही वो और निखर जाएगा। जगनुओं ने भी अपने नाम को जिंदा रखाबन गए रौशनी, पैग़ाम को जिंदा रखा। बहुत दिन बैठा तो लोहे की चमक जाती रहीमुश्किलें ना...
कोई गज़ल तो लिख
उन वंचितों पर भी जरा कोई गज़ल तो लिखझोपड़ी का हक जो मारे उस महल पर लिख। लबों, जुल्फों, सागरों पर शायरी आसान हैज़ुल्मतों के दौर पर भी एक बहर तो लिख। भूखे नंगे लोग किस उम्मीद से सजदा करेंअदालतें कानून हों गर बेअसर तो लिख। चांदनी पर शेर लिख जलती दुपहरी भूलतेसपने जहां पूरे न हों ऐसे बसर पर लिख। प्याला लिए साकी के साए में थिरकना चाहनाये भी भला कोई काम है अच्छा अगर तो लिख? दूसरे की आंख में आंसू का कतरा...
बरगद
यहीं एक बरगद हुआ करता था, पहलेहम उसकी छांव में खेले थे, पहले। गर्मियों में तो यहां घर का वहम होता थाघर यहां कम ही थे वैसे भी, पहले। पक्षियों ने भी यहीं नीड़ का निर्माण कियायहीं फल भी गिरा करते थे, पहले। हम कितने खुश थे जरा धूप और छाया मेंलोग भी कितने जुड़े थे, पहले। जड़ें ऊपर से नीचे को लटक आती थींवहीं वृक्ष भी बन जाती थीं, पहले। कैसा बदला ये जमाना कि बरगद न रहाजाने किस दर्द से गुजरा था, पहले।...
अक्सर भूल जाता हूं
क्या खूब झगड़ा आजकल सजदाघरों का हैमैं जब भी सिर झुकाता हूं ये अंतर भूल जाता हूं। मुझे मस्जिद कलीसे भी किसी मंदिर से लगते हैंमैं उनको देखकर खुद अपना मज़हब भूल जाता हूं? है मालिक कौन दुनिया का भला मैं पूछता क्यों हूं?कि यह भी उसकी मर्जी है मैं अक्सर भूल जाता हूं। खड़ा मैं जब भी होता हूं किसी सच के शिवाले मेंलगे किस रंग के झंडे मै अक्सर भूल जाता हूं। सियासत जो भी कहती हो, हूं मैं भी आदमी आखिरहिदायत...
जब चलते चलते रात हुई
जब चलते-चलते रात हुईउन छालों से कुछ बात हुईमंजिल का कोई पता नहींफिर आंखों से बरसात हुईथक कर बैठा था मनुज मौनजुगनू बोला रोता है कौन?आंसू क्यों व्यर्थ बहाते होबाधाओं से घबराते हो? आओ मैं तेरी थकन हरूंकुछ अपने मन की बात कहूंरातों के घने अंधेरे मेंजब जलता कोई दीप नहींपदचिन्हों की हर रेख मौनकिससे पूछेगा राह कौन?जब तारों पर छाते बादलतूफान हो गया हो पागलतब भी आशाएं होती हैंकुछ परिभाषाएं होती हैं। जो...
चराग़
जब एक चराग़ बुझ गया तूफान हंस पड़ाउसने समझा अब कहीं चराग़ नहीं। जगनुओं को देकर कसम चराग़ों नेअंधेरी राह पर फिर से उजाले कर दिए। वो उजालों का निगहबान होता जाएगाजो अंधेरों में पशेमान होता जाएगा। बस एक ज़ुबान की चाहत है इन उजालों कोअंधेरे देर तक मेहमान नहीं होते हैं। थर थर कांप रही है लौ, पर जिंदा हैदेर तक वो भी अंधेरों का भरम रखती है। तुम चराग़ न सही, जुगनू ही चलो हो जानाजिसमें न तेल है, न दिया है, न...
जिंदगी
जा के फिर जिंदगी नहीं आईवो गई और फिर नहीं आई। हर शहर ढूंढ लिया हर मोड़ पे तलाशा उसकोजो खुशबू पास से गुजरी, फिर नहीं आई। उसका मधुमास सा आना मेरे पतझड़ मेंवैसी पछुए में पुरवाई, फिर नहीं आई। अब तो खुशबू के सारे शहर जैसे रीत गएमहक कुछ ऐसी करिश्माई, फिर नहीं आई। प्यास बढ़ती ही रही पर वो प्याला न मिलाप्यार में ऐसी तवानाई, फिर नहीं आई। मौसमों का भी कोई रंग न देखा ऐसावैसी सर्दी में गरमाई, फिर नहीं आई।...
भोजपुरी
अब कहीं जड़ के सींचल जरूरी न बाआ भोजपुरी बोलल मजबूरी न बा।पहिन सूट बूटे में साहब निकललेंआधा उ हिंदी में उर्दू मिलवलेंअंग्रेजी के ऊपर से चिमकी लगकेवलेंआ तीनू मिला के पोजीशन बनवलेंआपन बोली बोलल केहू जानते न बाका ह भोजपुरी केहू समझते न बा।? लोग कहेलें चलs कुछु अच्छा सुनावsतू जिनीगिया पे हमरे कविता बनावsजल्दी से गावs तू ‘रिंकिया के पापा’एकरा आगे के हमरा ना तनिको बुझाताजवन एहमें मजा बा...