केहू केहू के अइसन बनावेलें रामकि देखि के भुला जाला सगरो कामका धन लेके केहु इहां पर करी?तू जेके हो जइबू उ तनि के चली। तू जिनिगिया में जबसे हो आ गईलूहमरे मनवां में हलचल मचा गइलूरात अंजोरिया के जइसे चमके लागलदिनवा चंदन के जैसे महके लागल। तोहर होठवा के लाली गुलाबे नियरतोहर अखिया मतावे शराबे नियरजब किरिनिया के जइसे उतरेलू तूलागे सरसों खिलल बाटे पियरे पियर। हो नगिनिया के जइसे तोहर चाल बाआ कारी बदरी के...
गंउआं छीना गइल हमसे हो भाई
देश विदेश के महंगा नोकरिया होगंउआं छोड़ा गइल हमसे हो भाईछुटिया बीतत तनिको देर ना लागेदुनिया बिला गइल सगरी हो माई। माई बाप बूढ़ अगोरेलें रहियादुखवा से तनिको हो उबरे न पाईंकेहू न बूझेला मनवां के बतियाकईसे बताईं आ का समझाईं? दूर भईलें सब खेतवा खलिहनवांबचपन के दिनवां जे बहुते रुलाईदूर भईलें सगरो बाग बगइचा होजहवां दुपहरिया हम जाके बिताईं। छोडि नौकरिया गांवें चली जाईं तकईसे सपनवां उ पूरा हो पाई?फूस के...
तुम हे वसंत फिर आ जाते…
तुम हे वसंत फिर आ जाते, तुम आ जातेनई नवेली कलियों से मेरा जीवन महका जातेउनको भी यहां बुला जाते, मेरा मन भी हर्षा जातेफिर से प्रेम निभाने के कुछ नूतन नियम बता जाते!तुम आ जाते…तुम हे वसंत फिर आ जाते… क्या दिन थे अपने यौवन के, वे पल थे कितने मनभावनहम घूमा करते तेरे संग, में, इस उपवन या उस उपवनवो गीतों छंदों की बातें, वो गजल सुनाने के मौसममन ही मन जोड़ा करते तुमसे जीवन के सब बंधन।तुम आ...
पीपल जाते कह गया
पीपल जाते कह गया, मत करना अब बातकितने दिवस आए नहीं, तुम भी तो मेरे पास? भूल गए मैना गौरैया, भूले शुक चितचोरभूल गई है कोयल भी, भूल गए सब मोर। पनघट मुझसे रूठ गया, लेता है मुंह को फेरनदिया भी अब पास नहीं, मांझी न गाता टेर। गोधूली भी स्वप्न हो गईं, दिखे न कोई ढोरचरवाहे अब भूल गए, आना ही इस ओर। भूल गए हैं मर्कट भी, करते थे जो किल्लोलभूल गईं हैं गिलहरियां, जो दौड़ा करतीं रोज। मैं साथी तेरे पुरखों का...
चापलूसी की तमन्ना
चापलूसी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है जोर कितना साहिबे-मसनद में है? हमने देखा उनके पैरों में हैं छाले हो गएहम तुरत ही आ के उनकी मरहम पट्टी कर गए। हमने देखा उनके घर में सब्जी की किल्लत हुईअगले पल ही सब्जीमंडी अपनी भी आदत हुई। उनके बालों में यकायक जो सफेदी आ गईहमको भी सहसा सफेदी की वो लज्जत भा गई। हम तो चंपी करने में भी खुद बड़े मशहूर हैंदिन रहे या रात को ही साहब बुलाते खूब हैं। उनका मुखड़ा...
वक्त
मुश्किलों का दौर भी आखिर तो गुजर जाएगावक्त से भागकर कोई शख्स किधर जाएगा? धूप हो, छांव हो या तूफान सफर में आएखत्म हो जाएगा जो हालात से डर जाएगा। राह चलते हुए कदमों की थकन भूल गएजूझने से ही तो सीरत पे असर आएगा। अंधेरी रात में चरागों का असर देखो तोतमस के बढ़ते ही वो और निखर जाएगा। जगनुओं ने भी अपने नाम को जिंदा रखाबन गए रौशनी, पैग़ाम को जिंदा रखा। बहुत दिन बैठा तो लोहे की चमक जाती रहीमुश्किलें ना...
कोई गज़ल तो लिख
उन वंचितों पर भी जरा कोई गज़ल तो लिखझोपड़ी का हक जो मारे उस महल पर लिख। लबों, जुल्फों, सागरों पर शायरी आसान हैज़ुल्मतों के दौर पर भी एक बहर तो लिख। भूखे नंगे लोग किस उम्मीद से सजदा करेंअदालतें कानून हों गर बेअसर तो लिख। चांदनी पर शेर लिख जलती दुपहरी भूलतेसपने जहां पूरे न हों ऐसे बसर पर लिख। प्याला लिए साकी के साए में थिरकना चाहनाये भी भला कोई काम है अच्छा अगर तो लिख? दूसरे की आंख में आंसू का कतरा...
बरगद
यहीं एक बरगद हुआ करता था, पहलेहम उसकी छांव में खेले थे, पहले। गर्मियों में तो यहां घर का वहम होता थाघर यहां कम ही थे वैसे भी, पहले। पक्षियों ने भी यहीं नीड़ का निर्माण कियायहीं फल भी गिरा करते थे, पहले। हम कितने खुश थे जरा धूप और छाया मेंलोग भी कितने जुड़े थे, पहले। जड़ें ऊपर से नीचे को लटक आती थींवहीं वृक्ष भी बन जाती थीं, पहले। कैसा बदला ये जमाना कि बरगद न रहाजाने किस दर्द से गुजरा था, पहले।...
अक्सर भूल जाता हूं
क्या खूब झगड़ा आजकल सजदाघरों का हैमैं जब भी सिर झुकाता हूं ये अंतर भूल जाता हूं। मुझे मस्जिद कलीसे भी किसी मंदिर से लगते हैंमैं उनको देखकर खुद अपना मज़हब भूल जाता हूं? है मालिक कौन दुनिया का भला मैं पूछता क्यों हूं?कि यह भी उसकी मर्जी है मैं अक्सर भूल जाता हूं। खड़ा मैं जब भी होता हूं किसी सच के शिवाले मेंलगे किस रंग के झंडे मै अक्सर भूल जाता हूं। सियासत जो भी कहती हो, हूं मैं भी आदमी आखिरहिदायत...
जब चलते चलते रात हुई
जब चलते-चलते रात हुईउन छालों से कुछ बात हुईमंजिल का कोई पता नहींफिर आंखों से बरसात हुईथक कर बैठा था मनुज मौनजुगनू बोला रोता है कौन?आंसू क्यों व्यर्थ बहाते होबाधाओं से घबराते हो? आओ मैं तेरी थकन हरूंकुछ अपने मन की बात कहूंरातों के घने अंधेरे मेंजब जलता कोई दीप नहींपदचिन्हों की हर रेख मौनकिससे पूछेगा राह कौन?जब तारों पर छाते बादलतूफान हो गया हो पागलतब भी आशाएं होती हैंकुछ परिभाषाएं होती हैं। जो...