हर समय बहार का मौसम नहीं होताहर दिवस भी प्यार का मौसम नहीं होता। कभी तो गर्मियां भी खूब लोगों को सताती हैंकभी तो बारिशें भी आसमां से रूठ जाती हैं। कभी जाड़ों की कंपाती ठंढ सबको बेध जाती हैया पतझड़ का महीना खींचता अपनी पनाहों को। कभी यूं लग रहा होता कि रातें बहुत लंबी हैंकभी तो ये भी लगता अब सहर फिर से नहीं होगी। थका सा आदमी ये मानकर खामोश रहता हैकि मौसम भी कहीं पर हर समय एक सा नहीं रहता। खिले हैं...
गंगा तुम अविरल ही बहना
गंगा तुम अविरल ही रहनातीर्थो के सारे घाटों परकलकल बहती रहनातुम ही तो हो मोक्षदायिनीतुम ही तो हो पतित पावनीतुम ही तो हो भरत भूमि कीसब नदियों का गहनागंगा तुम अविरल ही रहना। तुम भारत की जीवनरेखातुम काशी का भूषणतुम प्रयाग की कुंभवाहिनीकरती सबका पोषणबीती सदियों में क्या क्या बीतासबकी हो तुम साक्षीक्या क्या घटा कभी घाटों परदेखी हर परिपाटीकिसके किसके पाप धुले हैंकिसके रह गए बाकीसच अब तुम ही कहनागंगा तुम...
सुधर जाइए
अभी भी समय है सुधर जाइएबहुत लंबा सफर है सुधर जाइए।
देख लो लालिमा पूर्व में दिख रहीजल्द होता सहर है सुधर जाइए।
आंधियां कब रही किसी कैद मेंरात अंतिम पहर है सुधर जाइए।
नफरत की खेती बुरी चीज हैबीत जाए न खुद पर सुधर जाइए।
यह माना नशे में है ताकत बहुतपर जल्दी उतरता सुधर जाइए।
जाने कितने घरौंदे यूं ही टूटतेदर्द देता कहर है सुधर जाइए।
तल्ख़ियां कब तलक गूंजती रह गईउसकी सब पर नजर है सुधर जाइए।
लाखों सपने ढेरों गम
लाखों सपने ढेरों गमखुशियों के पल बहुत ही कमआस टूटती हो राहों परफिर भी न करना आँखें नम।लाखों सपने ढेरों गम…कभी न करना आँखें नम। तूफानों का शोर बोलताहम देखेंगे किसमें है दम?कौन चढ़ेगा शौर्य शिखर परकौन गिरेगा हो बेदम?लाखों सपने ढेरों गम…कभी न करना आँखें नम। छाए हों बादल, रात अंधेरीपांव में छाले, टूटता दममांग न लेना कोई सहाराजिससे होगी कीमत कम।लाखों सपने ढेरों गम…कभी न करना आँखें नम। जीवन की इस...
ये उलझनों के साए
ये उलझनों के साए जब भी हैं मन पे छाएहैं मुश्किलें सिखातीं कि कैसे कदम बढ़ाएं? अंधेरी सी उस डगर पर हो कोई न साथ तेरेफिर भी है राह मुमकिन जगनुओं ने सिखाए। डरना नहीं कभी तुम अनजाने रास्तों परबस हिम्मतों ने कितने सफर खुशनुमा बनाए। चलना तो होगा सबको हो वसंत या मरू होपर जीतता वही है जो आगे को बढ़ता जाय। बंजर सी रेत पर मैं ये गज़ल लिख रहा हूंहंसकर जो मुझसे कहती आ तुझको आजमाएं? एक शेर मेरा रख लो इस राह...
गांव बचा कर रखना
शहर में तो आ गए होपर गांव बचा कर रखनागर्मी यहां बहुत हैतुम छांव बचा कर रखना। वहां लगते थे कभी मेलेयहां रोज ही है मेलातुम इनमें खो न जाओये भाव बचा कर रखना। छलिया हैं सब यहां परये चकाचौंध रोशनी भीउजालों के पीछे छुपकरहै अंधेरों ने रहजनी की। चलना यहां संभलकरलुटते हैं रोज कितनेखाकर हजार धोखे भीस्वभाव बचा कर रखना। माटी ही आदमी हैसोंधी है जिसकी खुशबूयह शहर है बनावटआधार बचा कर रखना। झोली भले रहे...
जो नहीं खिले थे गुल कभी
जो नहीं खिले थे गुल कभीवो भी इस बहार में खिल गएजब तुम हो मुझको आ मिलेमेरे अंदाज ही हैं बदल गए। जो उजाले मेरी राह परकभी भूल कर भी गए नहींवो हैं खुद ही आकर पूछतेकि हम किधर को निकल गए? जो पहले थी आवारगीवो है ताजगी में बदल गईजो भी जिंदगी से मलाल थेवो रफ्ता रफ्ता संवर गए। जो थे सहमे सहमे थके थकेउन हौसलों में उड़ान हैजो भी गमों के दयार थेवो गज़ल बन के निखर गए। अब दश्त क्या, खिजां है क्या?मुझे कोई भी...
ये बहुत बड़ी बात है
जहां बगीचे थे, वहां रेगिस्तान हो गएघरों के आसपास कूड़ेदान हो गएतलो-तालाब सूखकर अनजान हो गएखेत खलिहान अब दुकान हो गए। घर घर न रहे, ऊंचे मचान हो गएलिहाज और शर्म बदनाम हो गएमंदिर, जो कभी थोड़ा सुकून देते थेसिमटकर अब गुमनाम हो गए। कोई रहे कहां और जाए कहां आजदरो दीवार सारे इश्तिहार हो गएदुनिया इतनी बदली कब, पता नहीं मुझेदिल के शीशे टूट कर गाहे गराज हो गए। खुली हवा का एक झोंका दूभर हुआ जहांअब कैमरे हैं...
संसार
यह प्यारा मधुमय सा संसारप्रात खोले है मन का द्वारदिवस भर खुशियों का अंबाररात को तारों में घर बार। क्षितिज जब उगता है सोनानींद छोड़े हैं हर कोनाकूकते कलरव करते खगकिरण से जगमग होता जग। फूल खिल उठते हैं सारेअंगड़ाई लेती हैं कलियांखुशबू फैल रही हर ओरजहां मदमस्त हो गए मोर। सुबह की भीगी यह खुशबूबुलाती मुझको अपने पासपुष्प पर भ्रमरो की अनुगूंजलगता है आया ज्यों मधुमास। फैलती महुए की चादरटपा टप पेड़ों के...
मुकाम
बहता रहा सदा ही नदी की धार में जैसेकुछ हाथ में था ही नहीं पतवार के जैसे। करता रहा सफर एक अनजानी डगर परजिस राह पर कोई न निकला था बसर पर। तिनका हूं मेरे हाथ में कुछ भी तो नहीं हैनजरों में दूर दूर तक कोई भी नही है। बस मान लिया मैने कि तू साथ खड़ा हैतबसे मेरा अंदाजे-बयां सबसे जुदा है। मालूम नहीं पंक्तियां ये कौन लिख रहाचुपचाप खड़ा देखता कागज़ सिमट रहा। कोई गज़ल भी मुझमें है सोचा ही नहीं थाएक गीत कभी...