भूले सजन लौटि आवs अब गऊंआ
लौटि आवs गऊंआ हो आवs हमरे गऊंआं
होए फेर तोहरो दर्शनवां हो रामा
लौटि आवs गऊंआं।
गऊंआ के सोना माटी सरसो फूलाइल
महुआ भी चदरा अस भुईंयां बिछाइल
फागुन के आवेला सपनवां हो रामा
लौटि आवs गऊंआं।
जबसे तू गईल पतियो न भेजल
अबला बियाहल के सुध बिसरवल
कइसन बा तोहरो करेजवा हो रामा?
लौटि आवs गऊंआं।
अबकि जे अईबो त लौटि न पईबो
नेहवा के डोर तोसे अईसन लगईबो
गऊंएं में बसिहें परनवां हो रामा
लौटि आवs गऊंआं।
शहर में जाई कईसे हमके भूलवल
कौन जोग डाकिन से नेहवा लगवल?
अचके में तोहे सब ठगिहैं हो रामा
लौटि आवs गऊंआं।
शहर के छल झूठ हमके डरावे
चिरई के जैसे केहू पिंजरा फंसावे
जाने कैसे बीतिहैं उमिरिया हो रामा?
लौटि आवs गऊंआं।
नयन में जल भरि बाट निहारीं
राम के आसरे में सिय के गुहारीं
बरिस से भेजल न पतिया हो रामा
लौटी आवs गऊंआं
तोहरे में बसेला परनवां हो रामा
चलि आवs गऊंआं।