चल चलीं गांव की ओरिया…
कि मन भरल रहत शहरिया
रहत शहरिया हो, करत नोकरिया
कि मन भरल रहत शहरिया…
कि चल चलीं गांव की ओरिया।
जहवां पर बीतल हो बचपन के दिनवां
जहवां पर लागेला सावन में झुलनवां
जहवां पर तोहर घर दुआर हो…
कि चल चलीं गांव की ओरिया।
नौकरी पर मेठ लोग रोज धमकावे
पाई पाई जोरि सब चऊका चलावे
महंग भईल दुई जून रोटिया…
कि चल चलीं गांव की ओरिया।
राहि देखत सूखि गइलें अखियां के पनियां
माई बाप याद करें तोहर जवनियां
घर के लाल भइलें अब पहुंनवां…
कि चल चलीं गांव की ओरिया।
गांव की ओरिया हो, गांव की ओरिया
रहत शहरिया हो, करत नोकरिया
टूट गईलें सगरो सपनवां…
कि चल चलीं गांव की ओरिया
चल चलीं गांव की ओरिया…
जहवां पर तोहर घर दुआर हो…
कि चल चलीं गांव की ओरिया।