माटी के लोगवा, रहि गईलें झोपड़िये मेंसेठ साहूकार लूटि गईलें रे बिदेशिया। खेतवा में सब दिन, खटेला जे मारे मारेकेहू ओके सुधियो ना लिहलें रे बिदेशिया। सबके अटरिया बनत गईलें दसो मालागरीबन के बतिया भूलईलें रे बिदेसिया। जेठ दुपहरिया में तियना बेचत रहेबुढिया नयन भरि लोर रे बिदेसिया। छोटे छोट लईका कागजे बीनत देखलीं होकहला पर केहू ना पतियाई रे बिदेसिया। राम के देसवा में भूखल नंगा लोग अबोगांधी के सपनवां का...
बदरी
तनी बरसs न हो…तनी बरसs न गऊंआं दलान बदरीरोज रोवेलें बैठलs किसान बदरीताप लीलत बाs लोगन के जान बदरीआजु फंसल बा चिरई के जान बदरीकईलू काहे तू हमके हैरान बदरी?तनी बरसs न गंऊआं दलान बदरी। तनी बरसs न हो…तनी बरसs न गऊंआं दलान बदरीलागी चिरई के कैसे ठेकान बदरी?जबसे कट गईलें सगरो बगान बदरीकहिया अइबू तू ले के फुहार बदरीईहां तरसत बाs दुनिया जहान सगरीतनी बरसs न गऊंआं दलान बदरी। तनी बरसs न हो…तनी बरसs न दुनिया...
चल चलीं गांव की ओरिया
चल चलीं गांव की ओरिया…कि मन भरल रहत शहरियारहत शहरिया हो, करत नोकरियाकि मन भरल रहत शहरिया…कि चल चलीं गांव की ओरिया। जहवां पर बीतल हो बचपन के दिनवांजहवां पर लागेला सावन में झुलनवांजहवां पर तोहर घर दुआर हो…कि चल चलीं गांव की ओरिया। नौकरी पर मेठ लोग रोज धमकावेपाई पाई जोरि सब चऊका चलावेमहंग भईल दुई जून रोटिया…कि चल चलीं गांव की ओरिया। राहि देखत सूखि गइलें अखियां के पनियांमाई बाप याद करें तोहर...