चार दिन चंदनियां के चहकल अंजोरिया
चार दिन पीरितिया के बात
चार दिन चंदरमा चमकलें अंगनवां
चार दिन सजनवां के साथ।
अगले ही दिनवां परदेश गईलें सजना
सजनी के मनवां उदास
अमवा के डलिया से पूछेली कोइलरि
काहे भइल बनवास?
निंदिया न आवे रामा भूखिओ न लागे
तनिको लागे ना पियास
मनवां ही मनवां गोरी पूछेले देवता
कईसन भइल मोरे साथ?
ऊहां परदेसवा में सजना उदासल
तरसे मिलनवां के आस
मनवां के सब बाति पतिया में लिखलें
देवें सजनियां के आस।
अगले सवनवां में आईब हो सजनी
तबले कठिन दिन मास
होइहैं रुपईया तबे घर अपने
हटिहैं गरीबिया के वास।
आधा जिनीगिया अन्हरिया में बीतल
अंजोरिया जगावेले आस
चंदनिया के जैसे तू जिनगी में अईलू
करs नाहीं मनवां उदास।
खेत बारी सब साहूकार लूटि लिहलें
भाई बिलइलें शराब
बहिनि बियाहे गहनवो बिकाइल
माई के उखड़ल सांस।
इ दिन अन्हारे के पखवा के जईसन
मोहसे बिछोहे के राति
पूनम चंदनिया सो सुखवा के दिनवां
आई हो अपने निवास।
छान्हि में कबले तू रहबू सजनियां
कबले अगोरबू उजास?
एक दिन जिनिगिया से छंटिहैं अन्हारवा
काहे करे मनवा उदास?
चार दिन दुअरिया पे महकल चमेलिया
चार दिन सुगनवां के साथ?
रोटी के खातिर उजड़लें सपनवां
भईलें अंगनवां निरास।
हो काहे करे मनवा उदास?