अमवां के बगिया से आवेले बयरिया, सबके करेले मतिभोर, हो रामा, हमके करेले मतिभोरनदिया के पनिया से उठेले लहरिया, मनवां में करत हिलोर, हो रामा, मनवां में करत हिलोर। सरसों के खेतवा में पियरी रंगाईल, महुआ चुए रे टपकोर, हो रामा, महुआ चुए रे टपकोरकौन सो देश गइलें मोरे सुगनवा, पतियो भेजे में कमजोर, हो रामा, पतियो भेजे में कमजोर। हमरे सजनवा के मति मारी गईलैं, पईसा भइल मुंहजोर, हो रामा, पईसा भइल मुंहजोरअबकी...
लौटि आव गऊंआ
भूले सजन लौटि आवs अब गऊंआलौटि आवs गऊंआ हो आवs हमरे गऊंआंहोए फेर तोहरो दर्शनवां हो रामालौटि आवs गऊंआं। गऊंआ के सोना माटी सरसो फूलाइलमहुआ भी चदरा अस भुईंयां बिछाइलफागुन के आवेला सपनवां हो रामालौटि आवs गऊंआं। जबसे तू गईल पतियो न भेजलअबला बियाहल के सुध बिसरवलकइसन बा तोहरो करेजवा हो रामा?लौटि आवs गऊंआं। अबकि जे अईबो त लौटि न पईबोनेहवा के डोर तोसे अईसन लगईबोगऊंएं में बसिहें परनवां हो रामालौटि आवs...
बदरी
तनी बरसs न हो…तनी बरसs न गऊंआं दलान बदरीरोज रोवेलें बैठलs किसान बदरीताप लीलत बाs लोगन के जान बदरीआजु फंसल बा चिरई के जान बदरीकईलू काहे तू हमके हैरान बदरी?तनी बरसs न गंऊआं दलान बदरी। तनी बरसs न हो…तनी बरसs न गऊंआं दलान बदरीलागी चिरई के कैसे ठेकान बदरी?जबसे कट गईलें सगरो बगान बदरीकहिया अइबू तू ले के फुहार बदरीईहां तरसत बाs दुनिया जहान सगरीतनी बरसs न गऊंआं दलान बदरी। तनी बरसs न हो…तनी बरसs न दुनिया...
जहाजिन
कहियो आवs न हो..कहियो आवs न हमरो दलान चिरईकि सुनाईं हम आपन बयान चिरईबहुते उजड़ल बा मनवां के छान चिरईजबसे छूटल ऊ पुरखन के गांव सगरीहिया अइंठे हो जैसे गतान चिरईकहियो बिसरल न दिनवा पुरान चिरईकहियो आवs न हमरो दलान चिरई। कहियो आवs न हो…कहियो आवs न हमरो दलान चिरईकि सुनाईं हम आपन बयान चिरईदूर भईलें हो रिश्ता नातान सगरीहम ना जनलीं फिरंगी के चाल चिरईबहुते जालिम बा गिरमिट के जाल चिरईहमसे बिछुड़ल हो गंऊआं...
जीये भोजपुरिया हो
जीयेs भोजपुरिया हो, जीयेs हो पुरबियाबसs चाहे जाई कौनो देशsआपन ई बोलीया भुलईहs न कबो रामाकेतनो अलग परिवेश। माटी के रंगवा रंगाइल ई बोलिया होमहके जा के हर देसडांटि के जो बोले केहू तबो लागे मीठे मीठतनिको लागे नाहिं ठेस। होलिया दिवलिया में गाईं भोजपुरियालागेला पुरबिये के तानमनवां में लागे जैईसे एही में जीनगीएही में सांझि आ बिहान। हमके त लागे जईसे एही में पीपरएही में कोईलिया के बानएही में ऊ सरसो पियर...
चल चलीं गांव की ओरिया
चल चलीं गांव की ओरिया…कि मन भरल रहत शहरियारहत शहरिया हो, करत नोकरियाकि मन भरल रहत शहरिया…कि चल चलीं गांव की ओरिया। जहवां पर बीतल हो बचपन के दिनवांजहवां पर लागेला सावन में झुलनवांजहवां पर तोहर घर दुआर हो…कि चल चलीं गांव की ओरिया। नौकरी पर मेठ लोग रोज धमकावेपाई पाई जोरि सब चऊका चलावेमहंग भईल दुई जून रोटिया…कि चल चलीं गांव की ओरिया। राहि देखत सूखि गइलें अखियां के पनियांमाई बाप याद करें तोहर...