उन दिनों मैं गांव पर था। जाड़े को रात में दरवाजे पर अलाव के पास लोग बैठ जाते और बतकही चलती रहती, कभी राजनीति की, कभी बीबीसी पर चल रहे युद्ध के समाचार की, कभी गांव के छोटे मोटे झगड़ों की और कभी कुछ भूत प्रेत इत्यादि की भी। छोटी उम्र में राजनीति तो बिलकुल समझ नहीं आती थी पर राजनीतिक विषय पर जब दो लोग जोर जोर से आपस में वाकयुद्ध करने लगते तो मजा आ जाता, गर्माहट बढ़ जाती और रात का सन्नाटा कुछ कम हो...