तुम हे वसंत फिर आ जाते, तुम आ जाते
नई नवेली कलियों से मेरा जीवन महका जाते
उनको भी यहां बुला जाते, मेरा मन भी हर्षा जाते
फिर से प्रेम निभाने के कुछ नूतन नियम बता जाते!
तुम आ जाते…तुम हे वसंत फिर आ जाते…
क्या दिन थे अपने यौवन के, वे पल थे कितने मनभावन
हम घूमा करते तेरे संग, में, इस उपवन या उस उपवन
वो गीतों छंदों की बातें, वो गजल सुनाने के मौसम
मन ही मन जोड़ा करते तुमसे जीवन के सब बंधन।
तुम आ जाते…तुम हे वसंत फिर आ जाते…
बस एक झलक पा लेने को बैठा करते थे हम निशदिन
कुछ बातें ही कर लेने को माना करते थे जीवन
कहीं किसी भी अवसर पर जो दिख जाते मेरे प्रियतम
हम अपने मन के दर्पण में एक प्रेम का दिया जला जाते!
तुम आ जाते…तुम हे वसंत फिर आ जाते…
कभी गुलाबों की खुशबू, या कभी मोगरा महका सा
मन को तेरे आने का भ्रम, दे जाता मौसम बहका सा
वो खुशी हमारे मिलने की, अब भी है मुझको याद प्रिये
वो पायल की रुनझुन न्यारी, तेरा अनुपम श्रृंगार प्रिये?
तुम फिर से आकर जीवन में मधुमास मेरा लौटा जाते!
तुम आ जाते…तुम हे वसंत फिर आ जाते…
तुम आ जाते, तुम आ जाते…
तुम हे वसंत फिर आ जाते…