झूठ के साथ चलना गवारा न थाउसके जलसे में कोई हमारा न था। जिगर पर नए घाव फिर से हुएहमें आह भरना गवारा न था। वह कब तक चलेगा यूं ही शान सेउस महकमे से रिश्ता हमारा न था। हमने देखा बहुत झूठ की फ़र्द कोपर सबूतों का कोई सहारा न था। वह कागज की कश्ती कहां जाएगीउसने सच को कहीं भी पुकारा न था। झूठ की हरकतें बढ़ गई आजकलउसकी ज़िंदाँ में मेरा गुजारा न था। सुबह होगी मगर लोग पछता रहेझूठ को वक्त रहते सुधारा न था।...
इंतजाम
शक-ओ-शुबहा पनप रहे हो जहांवहां जाने का दिल नहीं करताहोश की मिल्कियत को अबदिल लगाने का जी नहीं करता। कोई भी बच नहीं सकताइस माहौल की मक्कारी सेजहां पर सच के दावेदारों मेंतरफदारी हद से ज्यादा है। अब चेहरे साफ नहीं दिखतेजो कभी आईने से लगते थेआज हक के तलबगारो मेंनाउम्मीदी हद से ज्यादा है। साहिबे-दरबार अब हम परकुछ मेहरबान हद से ज्यादा हैमेरा कलाम मुझसे कहता हैयहां अंधेरा हद से ज्यादा है। जो भी हो अंजाम...
फूल
खिलाओ बंजर में फूल तुम भीयह वक्त हरदम मिला नहीं है। मिलाओ खतरों से आज नजरेंयह पल भी अक्सर दिखा नहीं है। जो काम करता वह आदमी हैयह आराम का मामला नहीं है। जो पर्वतों पर बनाता राहेंआसानी से तो चढ़ा नहीं है। गहरे पानी में रत्न मिलतेऔर कोई फलसफा नहीं है। तेरा पसीना ही बनेगा मोतीवह अभी तक गुनगुना नहीं है। बढ़ाओ हाथों का जोर फिर सेअभी तुममें वह सिरफिरा नहीं है। समय कहां है कि उदास बैठोसमय तो पीछे गया...
सफर
जिंदगी के सफर में कोई रात दिनकाम करता रहा कोई सोता रहामंजिलों ने स्वयं चुन लिया रास्ताकोई पाता रहा कोई खोता रहा। सदा प्यास चलकर कुएँ तक गईसदा कोशिशें बन गई रोशनीसदा कर्म को ही मिली मंजिलेकोई जगता रहा कोई सोता रहा। जो सदा कंटको से उलझता रहावह इबारत नई एक लिखता रहासफर की थकन जिसने माना नहींवह सदा ही शिखर पर पहुंचता रहा। आशा निराशा के सोपान कितनेयूं आकर मनुज को तराशा करेंजिंदगी को निभाना बड़ी बात...
मिठास
वह खत जो तुमने कभी लिखे थेअब न जाने कहां धरे हैं?इतने बरसों के बाद हम भीजाने किस वहमो-गुमां पड़े हैं? तुम अगरचे मिल जो जातेपूछते खत में क्या लिखा था?उन मौसमों के रंग क्या थेखिले थे डालों पर फूल कैसे? भुला दिया है हमने कैसेलम्हे जो इतने अजीज मुझकोकि अब जो सहसा लौट जाऊंउस जगह कुछ बचा नहीं है। जिन रास्तों पर हम चले थेउन रास्तों का क्या बना है?वह दरख़्त क्या हैं अब भी वैसेया वह सिमटकर ठूंठ से है? जो...
ऐ जिंदगी
ऐ जिंदगी, दो चार कदम साथ तो चलहोने दे उनसे अभी और मुलाकात तो चल। अभी-अभी तो उनके पास आकर बैठा हूंखुल जाएं जरा ठीक से जज्बात तो चल। मिले हैं इतने बरस बाद कि अब याद नहींहो जाए जरा शाम से अब रात तो चल। अभी तो आए है यादों के चंद झोंके हीहो जाए जरा आंखों से बरसात तो चल। हमारे प्यार का मधुमास अभी आया हैहो जाए उन्हें ठीक से एहसास तो चल। यही वक्त है अब दिल के जवां होने काउनकी खुशबू में मुझे और रवां होने...
मुस्कान
राह पर प्रस्थान फिर फिरमार्ग का अनुमान फिर फिरधूप हो या छांव फिर फिरगेह का निर्माण फिर फिर। कर नमन इन बाजुओं कास्वेद का कर दान फिर फिरकर्म पथ पर फिर भरोसाप्रारंभ हो श्रमदान फिर फिर। बस यही तो जिंदगी हैप्राप्ति का अरमान फिर फिरलक्ष्य पर संधान फिर फिरप्रेम का सम्मान फिर फिर। गर्दिशों की शाम जो होसुन ग़ज़ल की तान फिर फिरमरू हो या गुलशन कोई होनीड़ का निर्माण फिर फिर। ले मधु का जाम फिर फिरकर खुशी का...
उम्मीद
तुमसे मिलने की उम्मीद करता रहूंसाथ चलने की उम्मीद करता रहूंलोग कहते हैं तुम अब समझने लगेमन के मिलने की उम्मीद करता रहूं। अब तलक तो रही दूरियां दरमियांशायद मुझसे बड़ी हैं वे मजबूरियांतुम बंधन कभी भी छुड़ा ना सकेतुम दिलासे भी मुझको दिलाना सके यूं तो आए कई पल मुलाकात केबंद खुल ना सके अपने जज्बात केहै किया फैसला की कह देंगे हममन में जो भी छुपे हैं कमल भाव के। तुम जो चाहो तो कुछ मशवरे तुमको दूंरोज...
हर पल को ग़ज़ल कर दूं
यह बहुत है, तुम साथ हो मेरेजीवन में मिठास छलक आई हैवरना घर में बैठकर तन्हाहर पल का वजन गिनता। तुम दिन के हो उजालेरातों की महक तुम होहोठों पर मुस्कुराहट कीबस एक वजह तुम हो। कैसे यह समय बीतामालूम नहीं मुझकोअभी तो हम चले थेदो चार कदम मिलकर। अभी तो इश्क सीखा हैमजलिस के माहिरों सेबाकी है आजमानाकितने ही मशवरों को। अभी तो फलसफे भीसमझ में नहीं आएबस इतना जानता हूंतुम हो तो जिंदगी है। वक्त को थाम लूं...
ये उलझनों के साए
ये उलझनों के साए जब भी हैं मन पे छाएहैं मुश्किलें सिखातीं कि कैसे कदम बढ़ाएं? अंधेरी सी उस डगर पर हो कोई न साथ तेरेफिर भी है राह मुमकिन जगनुओं ने हैं बताए। डरना नहीं कभी तुम अनजाने रास्तों परबस हिम्मतों ने कितने सफर खुशनुमा बनाए। चलना तो होगा सबको हो वसंत या मरू होपर जीतता वही है जो स्वेद में नहाए। बंजर सी रेत पर मैं ये गज़ल लिख रहा हूंहंसकर जो मुझसे कहती आ तुझको आजमाएं? एक शेर मेरा रख लो इस राह...