आज कहानी प्रारंभ करने के पहले मोबाइल देवता को नमन कर लेता हूं क्योंकि यह कहानी उन्हीं पर है। आपको याद होगा गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में सबसे पहले देवताओं की वंदना की है, फिर बाद में स्वांत: सुखाय पर बात खत्म की है। आज का विषय कुछ ऐसा ही है, कभी-कभी तो मुझे लगता है कि मोबाइल देवता कलयुग में साक्षात परमेश्वर के अवतार है क्योंकि धरती पर किसी देवता के आने का प्रभाव सभी मनुष्यों पर पड़ता है।...
मलाल
कितने चले गए, कितने बिछड़ गएयह मलाल रह गया, कि गले न लग सकेइस राह चलते चलते, कई हमसफर मिलेयह मलाल रह गया, कि अपने न बन सके। कितनों के साथ अपनी कुछ रंजिशें रहींयह मलाल रह गया, न मसले सुलझ सकेफिर से अगर जुड़े भी बरसों से टूटे रिश्तेयह मलाल रह गया, कि वैसे न रह सके। कितने हसीन पल भी आ कर निकल गएयह मलाल रह गया, क्यों ना संजो सके?वह पल कभी न लौटा, जो आकर गुजर गयायह मलाल रह गया, कि हम देखते रहे। अपनी...
हिन्दी
मैं हिन्दी हूं, मैं हिन्दी हूंमैं भारत मां की बिंदी हूंजो सदा सुशोभित वसुधा परमैं शब्दों की कालिंदी हूं।
है ओज रहा परिचय मेराहै जोश सदा सहचर मेरामैं जिह्वा की आनंदी हूंमैं हिन्दी हूं, मैं हिन्दी हूं।
मैं भावों का सुंदर संयोजनभारत का ऊर्जित संबोधनसंस्कृतियों की मैं संधि हूंमैं हिन्दी हूं, मैं हिन्दी हूं।
सैनिक गीत
जा रे चंदा, जा रे सूरजजा रे बदरा, जा रे बिजुरियाले आ सनेसवा, ले आ असीसवाकि कैसन बाड़ी हमार माई हो? माई के दिनवां अब कईसे कटेलासांस के उखड़ल कईसे दबेलादिन राति देखत होईहैं हमरे सुरतियामाई के मनवां त मोरे में बसेला। जा रे पवनवां, जा रे पुरवैयाजा रे अंजोरिया, जा रे बिजुरियाले जा परनमवां, ले आ असीसवाकि कैसन बाड़े हमार बाप हो? खेतिया में साथ उनके अब के खटेला?घरवा के काम अब कईसे डगरेलादुअरा पर के...
भोजपुरी गीत
अमवां के बगिया से आवेले बयरिया, सबके करेले मतिभोर, हो रामा, हमके करेले मतिभोरनदिया के पनिया से उठेले लहरिया, मनवां में करत हिलोर, हो रामा, मनवां में करत हिलोर। सरसों के खेतवा में पियरी रंगाईल, महुआ चुए रे टपकोर, हो रामा, महुआ चुए रे टपकोरकौन सो देश गइलें मोरे सुगनवा, पतियो भेजे में कमजोर, हो रामा, पतियो भेजे में कमजोर। हमरे सजनवा के मति मारी गईलैं, पईसा भइल मुंहजोर, हो रामा, पईसा भइल मुंहजोरअबकी...
लौटि आव गऊंआ
भूले सजन लौटि आवs अब गऊंआलौटि आवs गऊंआ हो आवs हमरे गऊंआंहोए फेर तोहरो दर्शनवां हो रामालौटि आवs गऊंआं। गऊंआ के सोना माटी सरसो फूलाइलमहुआ भी चदरा अस भुईंयां बिछाइलफागुन के आवेला सपनवां हो रामालौटि आवs गऊंआं। जबसे तू गईल पतियो न भेजलअबला बियाहल के सुध बिसरवलकइसन बा तोहरो करेजवा हो रामा?लौटि आवs गऊंआं। अबकि जे अईबो त लौटि न पईबोनेहवा के डोर तोसे अईसन लगईबोगऊंएं में बसिहें परनवां हो रामालौटि आवs...
बदरी
तनी बरसs न हो…तनी बरसs न गऊंआं दलान बदरीरोज रोवेलें बैठलs किसान बदरीताप लीलत बाs लोगन के जान बदरीआजु फंसल बा चिरई के जान बदरीकईलू काहे तू हमके हैरान बदरी?तनी बरसs न गंऊआं दलान बदरी। तनी बरसs न हो…तनी बरसs न गऊंआं दलान बदरीलागी चिरई के कैसे ठेकान बदरी?जबसे कट गईलें सगरो बगान बदरीकहिया अइबू तू ले के फुहार बदरीईहां तरसत बाs दुनिया जहान सगरीतनी बरसs न गऊंआं दलान बदरी। तनी बरसs न हो…तनी बरसs न दुनिया...
जहाजिन
कहियो आवs न हो..कहियो आवs न हमरो दलान चिरईकि सुनाईं हम आपन बयान चिरईबहुते उजड़ल बा मनवां के छान चिरईजबसे छूटल ऊ पुरखन के गांव सगरीहिया अइंठे हो जैसे गतान चिरईकहियो बिसरल न दिनवा पुरान चिरईकहियो आवs न हमरो दलान चिरई। कहियो आवs न हो…कहियो आवs न हमरो दलान चिरईकि सुनाईं हम आपन बयान चिरईदूर भईलें हो रिश्ता नातान सगरीहम ना जनलीं फिरंगी के चाल चिरईबहुते जालिम बा गिरमिट के जाल चिरईहमसे बिछुड़ल हो गंऊआं...
जीये भोजपुरिया हो
जीयेs भोजपुरिया हो, जीयेs हो पुरबियाबसs चाहे जाई कौनो देशsआपन ई बोलीया भुलईहs न कबो रामाकेतनो अलग परिवेश। माटी के रंगवा रंगाइल ई बोलिया होमहके जा के हर देसडांटि के जो बोले केहू तबो लागे मीठे मीठतनिको लागे नाहिं ठेस। होलिया दिवलिया में गाईं भोजपुरियालागेला पुरबिये के तानमनवां में लागे जैईसे एही में जीनगीएही में सांझि आ बिहान। हमके त लागे जईसे एही में पीपरएही में कोईलिया के बानएही में ऊ सरसो पियर...
ये और बात है
ये और बात है कि मैं कुछ नहीं कहता तुमकोइस नए शौक के कुछ तो मायने होंगे।
लोग मजमून जान लेते थे कभी लिफाफे सेतुम कौन सुखनवर हो की अंजान बने रहते हो?
वह भी एक दौर था जब दिलों पर ताले कम थेअब गुजारिश है कि हवा को तो हवा रहने दो।
नशे का वक्त है शायद होश कहां अब मुमकिनयह मेरी जिद है कि पहचान बनी रहती है।
मेरी जुबान तू सच कहने में डरती क्यों हैतोहमत ए दाग से तो चांद भी न बच पाया है।