मां पार्वती को कैलाश पर बहुत दिनों बाद रंगद्वीप का कोई समाचार पत्र मिला था जिसे रुद्र अभी अभी उन्हें दे कर गए थे। प्रथम पृष्ठ पर रंगद्वीप में किसी मंदिर के उद्घाटन का जिक्र था और एक बड़ी ही मनमोहक तस्वीर भी मंदिर की छपी थी। मंदिर का जिक्र आते ही उन्हें जंबूद्वीप के काशी क्षेत्र में बने अपने आराध्य महादेव के मंदिर की याद आई जहां से वह दो वर्ष पूर्व ही होकर आईं थीं। उनकी जिज्ञासा और बढ़ गई और वह...
अनबोलता
मेरे गांव में एक अनबोलता बाबा जी ने कुछ दिनों पहले ही पदार्पण किया था। उनके द्वारा कथावचन का पोस्टर देखकर लोग अचंभे में पड़ जा रहे थे क्योंकि कथावचन शब्द ही अनबोलता शब्द के शाब्दिक अर्थ से एकदम अलग होता है। तफ्तीश करने पर लोग बता रहे हैं कि ये अनबोलता बाबा तभी बोलते हैं जहां पूछे गए प्रश्न धर्म को बढ़ावा देते हों, और अगर किसी ने इधर उधर के सवाल पूछे तो अनबोलता जी मौन धारण कर लेते हैं क्योंकि वे...
डांस पे चांस
एक फिल्मी गाना कुछ वर्षों पहले आया था जिसका मुखड़ा कुछ “डांस पे चांस मार ले” से शुरू होता है। उस समय तो इसका मतलब मुझे समझ नहीं आया कि गायक कहना क्या चाहता है पर इसका अर्थ मुझे अब समझ में आया है।’डांस पे चांस मार ले’ गाना तो उनके लिए था जिन्हें डांस आता हो पर जिन्हें डांस का कुछ भी नहीं आता वे क्या करेंगे, गाना लिखने वाले को ये अवश्य सोचना चाहिए था। वैसे आजकल शादियों का...
पुतलियों के प्रश्न
राजा विक्रमादित्य के देहावसान के बाद सदियां बीत चुकी थीं पर भारत में उनके द्वारा स्थापित की गई राज्य व्यवस्था अभी भी वैसे ही चल रही थी । उनके सिंहासन की बत्तीस पुतलियां अभी भी सिंहासन में जड़ी हुई थीं और उनके लिए राजा की परीक्षा लेना रूटीन कार्य हो चुका था। राजा आते, जाते, फिर नए आते, सदियों से यही चल रहा था। उनके मन मस्तिष्क में धीरे धीरे एक उदासी ने घर बना लिया था। हां, नए राजा के आने के पश्चात...
मंडूक स्तवन
कल स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्र सागर पांडेय के एक प्रश्न ने मुझे चौंका दिया। उसने पूछा, “सर, लॉर्ड मैकाले की मिनट तो अठारह सौ पैंतीस की है, फिर आज भी लोग उस को बुरा भला क्यों कहते हैं, क्या वह अभी भी कोई भूमिका निभा कर रहा है अपनी शिक्षा नीति में?” अचानक पूछे गए प्रश्न से मैं थोड़ा चिंतित तो हुआ लेकिन मुझे उसकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए कुछ तो कहना था। अतः मैंने उससे कहा, “अब यह सवाल...
पहला विश्वगुरु
अभी-अभी स्नातकोत्तर अंग्रेजी की कक्षा से ग्रीक दार्शनिक एवं आलोचक लोंजाइनस की सब्लाइम थ्योरी पढ़ा कर लौटा था। सब्लिमिटी की व्याख्या करते समय मैंने उनसे कुछ शब्दजालों की बात की जो अक्सर आलोचक दे दिया करते हैं और फिर उस पर लंबी लंबी बहस और चर्चाएं शुरू हो जाती है। लोंजाइनस अलंकार शास्त्र में सब्लाइम के द्वारा एक ऐसी स्थिति को परिभाषित कर रहा था जब भाषा एक ऐसे स्तर पर पहुंच जाए जहां पर उसकी...
अपना अपना मोक्ष
प्रोफेसर शिवकुमार अपने विभाग में अपने अगले व्याख्यान की तैयारी कर रहे थे। कुछ परेशान भी लग रहे थे तभी विभागाध्यक्ष ने कक्ष में प्रवेश किया। “नमस्कार बंधु, कैसे हैं? सब कुशल तो है न? उन्होंने पूछा।न जाने कैसे उन्होंने प्रोफेसर शिवकुमार के चेहरे पर अंकित परेशानी की रेखाएं पढ़ ली थीं। “नमस्कार, सब ठीक है सर, आप कैसे हैं?” प्रोफेसर शिवकुमार ने पूछा। “मैं भी ठीक हूं, क्लास कब है?” “बस, इसके बाद।” “अरे...
बरगद से बोनसाई
सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के दौर से गुजरते हुए हम सब कहां से कहां आ चुके हैं। प्रगतिशील लोग खुश हैं क्योंकि उन्होंने गांव जैसी इकाई के टुकड़े-टुकड़े कर दिए हैं और उनकी विजय पताका जगह-जगह चौक चौराहों पर बड़े-बड़े लैंप पोस्ट, फव्वारे एवं गगनचुंबी इमारतों के रूप में फहरा आ रही है। अब शहर ही आदमी का सबसे बड़ा ठिकाना है, हर आदमी गांव से शहर की ओर भाग रहा है, कभी ना पूरे हो सकने वाले सपनों की तलाश...
फेक न्यूज
आजकल फेक न्यूज बहुत चर्चा में है। ‘फेक देना’ कुछ दिनों पहले तक क्रिया हुआ करता पर अब ‘फेक’ शब्द का एक विशेषण के रूप में भी प्रयोग होने लगा है। वैसे न्यूज भी पहले न्यूज ही हुआ करती थी। न्यूज पाने के बहुत से साधन हैं जैसे रेडियो, टेलीविजन और गपशप। ये तीनों साधन बहुत पहले से हमारे जीवन में हैं। इनमें रेडियो और गपशप या बतकही सबसे प्राचीन। रेडियो हमारे बचपन का साथी है पर अब वह...
दस्तखत
बड़े अधिकारियों के कष्ट कई तरह के होते हैं, कभी दस्तखत में ताकत होने की असहजता उन्हें चैन से सोने नहीं देती तो कभी दस्तखत की ताकत खो जाने का भय उन्हें सालता रहता है । यह दोनों अवस्थाएं बड़ी ही कष्टदायी हैं और इस कारण उनके स्वभाव में एक अलग सी बेचैनी नजर आना स्वाभाविक है। इसलिए बड़े अधिकारियों के साथ कुछ छोटी-मोटी घटनाएं हो जाया करती हैं। साहब एक बड़े संस्थान में अधिकारी थे। आप उन्हें श्रीमान...