यहीं एक बरगद हुआ करता था, पहलेहम उसकी छांव में खेले थे, पहले। गर्मियों में तो यहां घर का वहम होता थाघर यहां कम ही थे वैसे भी, पहले। पक्षियों ने भी यहीं नीड़ का निर्माण कियायहीं फल भी गिरा करते थे, पहले। हम कितने खुश थे जरा धूप और छाया मेंलोग भी कितने जुड़े थे, पहले। जड़ें ऊपर से नीचे को लटक आती थींवहीं वृक्ष भी बन जाती थीं, पहले। कैसा बदला ये जमाना कि बरगद न रहाजाने किस दर्द से गुजरा था, पहले।...
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूं
फूल बनकर मुस्कुराना चाहता हूंडालियों पर झूल जाना चाहता हूंउम्र मेरी बस जरा सी ही सहीमैं दिलों में घर बनाना चाहता हूं। भ्रमर जैसे खोजता हूं उस मधु कोप्राप्ति जिसकी मोक्ष का पर्याय होकागज़ी इस पैरहन का क्या भरोसामैं हरेक लम्हे को जीना चाहता हूं। मधु जो अलग हो सारे मधु सेमैं होठों से लगाना चाहता हूंजो भर दे तृप्ति से मेरे हृदय कोआनंद में जीवन बिताना चाहता हूं। दृश्य हो, नृत्य भी हो, गान भी होक्षितिज...
अक्सर भूल जाता हूं
क्या खूब झगड़ा आजकल सजदाघरों का हैमैं जब भी सिर झुकाता हूं ये अंतर भूल जाता हूं। मुझे मस्जिद कलीसे भी किसी मंदिर से लगते हैंमैं उनको देखकर खुद अपना मज़हब भूल जाता हूं? है मालिक कौन दुनिया का भला मैं पूछता क्यों हूं?कि यह भी उसकी मर्जी है मैं अक्सर भूल जाता हूं। खड़ा मैं जब भी होता हूं किसी सच के शिवाले मेंलगे किस रंग के झंडे मै अक्सर भूल जाता हूं। सियासत जो भी कहती हो, हूं मैं भी आदमी आखिरहिदायत...
जब चलते चलते रात हुई
जब चलते-चलते रात हुईउन छालों से कुछ बात हुईमंजिल का कोई पता नहींफिर आंखों से बरसात हुईथक कर बैठा था मनुज मौनजुगनू बोला रोता है कौन?आंसू क्यों व्यर्थ बहाते होबाधाओं से घबराते हो? आओ मैं तेरी थकन हरूंकुछ अपने मन की बात कहूंरातों के घने अंधेरे मेंजब जलता कोई दीप नहींपदचिन्हों की हर रेख मौनकिससे पूछेगा राह कौन?जब तारों पर छाते बादलतूफान हो गया हो पागलतब भी आशाएं होती हैंकुछ परिभाषाएं होती हैं। जो...
चराग़
जब एक चराग़ बुझ गया तूफान हंस पड़ाउसने समझा अब कहीं चराग़ नहीं। जगनुओं को देकर कसम चराग़ों नेअंधेरी राह पर फिर से उजाले कर दिए। वो उजालों का निगहबान होता जाएगाजो अंधेरों में पशेमान होता जाएगा। बस एक ज़ुबान की चाहत है इन उजालों कोअंधेरे देर तक मेहमान नहीं होते हैं। थर थर कांप रही है लौ, पर जिंदा हैदेर तक वो भी अंधेरों का भरम रखती है। तुम चराग़ न सही, जुगनू ही चलो हो जानाजिसमें न तेल है, न दिया है, न...
जिंदगी
जा के फिर जिंदगी नहीं आईवो गई और फिर नहीं आई। हर शहर ढूंढ लिया हर मोड़ पे तलाशा उसकोजो खुशबू पास से गुजरी, फिर नहीं आई। उसका मधुमास सा आना मेरे पतझड़ मेंवैसी पछुए में पुरवाई, फिर नहीं आई। अब तो खुशबू के सारे शहर जैसे रीत गएमहक कुछ ऐसी करिश्माई, फिर नहीं आई। प्यास बढ़ती ही रही पर वो प्याला न मिलाप्यार में ऐसी तवानाई, फिर नहीं आई। मौसमों का भी कोई रंग न देखा ऐसावैसी सर्दी में गरमाई, फिर नहीं आई।...
भोजपुरी
अब कहीं जड़ के सींचल जरूरी न बाआ भोजपुरी बोलल मजबूरी न बा।पहिन सूट बूटे में साहब निकललेंआधा उ हिंदी में उर्दू मिलवलेंअंग्रेजी के ऊपर से चिमकी लगकेवलेंआ तीनू मिला के पोजीशन बनवलेंआपन बोली बोलल केहू जानते न बाका ह भोजपुरी केहू समझते न बा।? लोग कहेलें चलs कुछु अच्छा सुनावsतू जिनीगिया पे हमरे कविता बनावsजल्दी से गावs तू ‘रिंकिया के पापा’एकरा आगे के हमरा ना तनिको बुझाताजवन एहमें मजा बा...
घरौंदा
लोग आते रहेंगे, लोग जाते रहेंगेहम कहानी खुद अपनी बनाते रहेंगेबहारों का मौसम या पतझड़ कोईहम तुझपर दिलो-जां लुटाते रहेंगे। तुम जो चलकर थकोगे कभी राह परकांधे थपकी हम आकर लगाते रहेंगेइंद्रधनुषों में जैसे खिले सात रंगतुझको सपनों में आकर जगाते रहेंगे। हमने यहां कुछ लकीरों को खींचालकीरों से कितनों को रस्ता मिलाकभी रश्मियों से कभी जगनुओं सेहम तेरी राह रौशन बनाते रहेंगे। हमने गमों के सभी रंग देखेबहुत से...
कोहरा
मानता हूं कि अब कोहरा घना हैमगर चुप बैठने से क्या बना है? घर से निकल कुछ कर के देखोअंगीठी सेकने से क्या बना है? महज संघर्ष ही है राह वत्सलचुपचाप बैठे सोचने से क्या बना है? लड़ेंगे जूझेंगे कठिनाइयों सेसिर्फ अंगड़ाईयों से क्या बना है? जो कहते हैं कमजोर तुमकोउनके कहने भर से क्या बना है? बेमन हो के तुम कुछ भी न करनाकर्म को त्यागने से क्या बना है? अमावस भी तो अक्सर जगनुओं से हारती हैनियति से हार को...
जो न मिला सोचकर के क्या होगा?
जो न मिला सोचकर के क्या होगा?एक नए गम का सिलसिला होगा। मंजिलें और भी तो हैं मुमकिनआदमी और भी रवां होगा। फूल गर गिर गए हैं शाखों सेपुष्परज वहीं पर गिरा होगा। चमन में फ़स्ल-ए-गुल के आते हीनई कलियों का सिलसिला होगा। लकीरें खींच ले नई खुद हीलकीरें खोजने से क्या होगा? रंज का वक्त कबका बीत गयाजख्म की सोचने से क्या होगा? अंधेरे जगनुओं से हार गएरौशनी खोजने से क्या होगा? राह पर आगे को कदम तो बढ़ासिर्फ बस...