राह पर प्रस्थान फिर फिरमार्ग का अनुमान फिर फिरधूप हो या छांव फिर फिरगेह का निर्माण फिर फिर। कर नमन इन बाजुओं कास्वेद का कर दान फिर फिरकर्म पथ पर फिर भरोसाप्रारंभ हो श्रमदान फिर फिर। बस यही तो जिंदगी हैप्राप्ति का अरमान फिर फिरलक्ष्य पर संधान फिर फिरप्रेम का सम्मान फिर फिर। गर्दिशों की शाम जो होसुन ग़ज़ल की तान फिर फिरमरू हो या गुलशन कोई होनीड़ का निर्माण फिर फिर। ले मधु का जाम फिर फिरकर खुशी का...
उम्मीद
तुमसे मिलने की उम्मीद करता रहूंसाथ चलने की उम्मीद करता रहूंलोग कहते हैं तुम अब समझने लगेमन के मिलने की उम्मीद करता रहूं। अब तलक तो रही दूरियां दरमियांशायद मुझसे बड़ी हैं वे मजबूरियांतुम बंधन कभी भी छुड़ा ना सकेतुम दिलासे भी मुझको दिलाना सके यूं तो आए कई पल मुलाकात केबंद खुल ना सके अपने जज्बात केहै किया फैसला की कह देंगे हममन में जो भी छुपे हैं कमल भाव के। तुम जो चाहो तो कुछ मशवरे तुमको दूंरोज...
हर पल को ग़ज़ल कर दूं
यह बहुत है, तुम साथ हो मेरेजीवन में मिठास छलक आई हैवरना घर में बैठकर तन्हाहर पल का वजन गिनता। तुम दिन के हो उजालेरातों की महक तुम होहोठों पर मुस्कुराहट कीबस एक वजह तुम हो। कैसे यह समय बीतामालूम नहीं मुझकोअभी तो हम चले थेदो चार कदम मिलकर। अभी तो इश्क सीखा हैमजलिस के माहिरों सेबाकी है आजमानाकितने ही मशवरों को। अभी तो फलसफे भीसमझ में नहीं आएबस इतना जानता हूंतुम हो तो जिंदगी है। वक्त को थाम लूं...
नाता टूटि गईल
जेकर गंऊंआ से नाता टूटि गईलओकर जिंदगी त कहेला बेकरवे बाsजे भी खेतवन में कबहूं उतरल नाहींओकर धरती पर आइल भारवे बाs। जब माटी के खुशबू समाइल नाहींत ओकर जिनगिए बेमरिए बाsजब जाने नाहिं कि गऊंआ का हत जियाने ऊ सगरो उमिरिए बाs। आई के बैठs कबो तू पिपरा तरेतबे जनबs कि कईसन बयरिये बाs?जे भी होरहा आ चटनी जानल नाहिंओके महुअर के पूछल भुलवने बाs। आम के बगईचा में खटिया बिछलआ दुपहरिये में ओकर टप टप चुअलकबो खिरिया...
ये उलझनों के साए
ये उलझनों के साए जब भी हैं मन पे छाएहैं मुश्किलें सिखातीं कि कैसे कदम बढ़ाएं? अंधेरी सी उस डगर पर हो कोई न साथ तेरेफिर भी है राह मुमकिन जगनुओं ने हैं बताए। डरना नहीं कभी तुम अनजाने रास्तों परबस हिम्मतों ने कितने सफर खुशनुमा बनाए। चलना तो होगा सबको हो वसंत या मरू होपर जीतता वही है जो स्वेद में नहाए। बंजर सी रेत पर मैं ये गज़ल लिख रहा हूंहंसकर जो मुझसे कहती आ तुझको आजमाएं? एक शेर मेरा रख लो इस राह...
कादंबरी
इन ऊंचे नीचे रास्तों मेंमंजिलों के वास्तों मेंकोई प्रियतम आन मिलताकोई प्रिय सहसा बिछड़ता। कभी उत्थान का आनंद हैकभी गर्दिशों की शाम हैचलते ही जाना जिंदगी हैपल भर नहीं विश्राम है? मार्ग का आकर्ष सबकोऔर आगे खींचता हैक्षितिज का हर बिंब नूतनकदमों को मेरे तौलता है। हर नदी श्वेतांबरा सीअपनी गति से दर्श देतीएक ताजगी सी जागती हैजब भी कोई पवन चलती। कंटको का क्या भरोसाकब पगों को बेध देंगेखाईयों का क्या...
अरदास
समय के वेग में यूं बढ़ गए कदमयाद ही ना रहा प्रेम कहना है कबतुम सामने से कुछ यूं ओझल हुएहोश ही ना रहा संजोना है कब? वश में था ही नहीं थाम लें वक्त कोमांग लें, गढ़ ही लें मुकद्दर नयारोक लें हम तुम्हें भर के आगोश मेंथा पता ही नहीं दूर होना है क्या? ओस का ओज ज्यो घास में बुझ गयाजैसे थम सा गया समंदर कोईफूल की डाल से पुष्प जैसे गिरेटूट गिरता है ज्यों तेज तारा कोई। ठीक वैसे गए तुम मुझे छोड़ करयह लगा ही...
मौसम
पिछला मौसम बीत गयाथा वह कितना अपना साबस कुछ डालों पर फूल न थेपर था वह कितना सपना सा। पिछले मौसम में हमने कितनेकलियों पर अपना दिल हारापिछला मौसम ही मौसम थाभंवरे रस पीकर मदमस्त हुए। पिछले मौसम में हमने तेरेबालों को बदली मान लियापिछला मौसम में ही तुमनेकजरारे अपने नैन किए। पिछले मौसम में कोयल नेअपने मन की बात कहीमधु के गुच्छे डालो पर लटकेअमिया से अनुबंध हुए। पिछले मौसम में हमनेगीतों में सब कुछ लिख...
माटी के लोगवा
माटी के लोगवा, रहि गईलें झोपड़िये मेंसेठ साहूकार लूटि गईलें रे बिदेशिया। खेतवा में सब दिन, खटेला जे मारे मारेकेहू ओके सुधियो ना लिहलें रे बिदेशिया। सबके अटरिया बनत गईलें दसो मालागरीबन के बतिया भूलईलें रे बिदेसिया। जेठ दुपहरिया में तियना बेचत रहेबुढिया नयन भरि लोर रे बिदेसिया। छोटे छोट लईका कागजे बीनत देखलीं होकहला पर केहू ना पतियाई रे बिदेसिया। राम के देसवा में भूखल नंगा लोग अबोगांधी के सपनवां का...
नेहवा लगा के(भजन)
नेहवा लगा के राम कहां चलि गइलsअयोध्या में आ के राम कहां चलि गइलs?हमके बोला के राम कहां चलि गइलsमर्यादा सिखा के राम कहां चलि गइलs? सुनिले बैकुंठे में तोहार ठेकान बासुनिले कि क्षीरसागर बहुते कमाल बामनई रूप आ के राम कहां चलि गइलsरहिया देखा के राम कहां चलि गइलs? इंहां बाट जोहत तोहर केतना जुग बीतलअवध राम बिन जैसे सोना भईल पीतलदरस देखा के राम कहां चलि गइलsहमके बोला के राम कहां चलि गइलs? सून सब मंदिर...