फिर खिलेंगे फूल प्रियतमफिर से होगी भोरआस की किरण जगेंगीमधुमास में चहूं ओर। रातरानी फिर करेगीनींद से मुंहजोरमोगरे पर फिर से होंगेभ्रमर, रस के चोर। सुख-दुख लिखे हैं नियति मेंज्यों दिवस में अवसानरात का होना निरंतरहै सुबह का सम्मान। सुख परखता आदमी केकर्म को, संज्ञान कोदुख परखता आत्मबल कोतेज को, अभिमान को। क्या मनुज जो रो रहा हैअल्प से ठहराव मेंक्या मनुज जो दुखी होकरडूबता अवसाद में। क्या हुआ जो आज...
सुप्रीम कोर्ट ऑफ देवरिया
ट्रिन,ट्रिन,ट्रिन…ट्रिन,ट्रिन,ट्रिन…ट्रिन,ट्रिन! अचानक फोन की घंटी बजी। मैं सो रहा था । घड़ी देखा तो रात के तीन बज रहे थे, मैं सोचने लगा, इस समय कौन हो सकता है? चिंता हो गई, कहीं कोई अशुभ समाचार तो नहीं, या कोई मदद के लिए बुला तो नहीं रहा? हड़बड़ा कर उठा, मोबाइल की घंटी अभी भी बज रही थी, उठाकर देखा तो डॉ भूप की कॉल थी। घबरा कर फोन उठाया, पूछा “अरे भाई क्या हुआ?” “उठिए भैया, आपको पता...
चाणक्य की पाटलिपुत्र यात्रा
चाणक्य अपने कक्ष में विश्राम कर रहे थे तभी अनुचर ने उन्हें उनके शिष्य चंद्रगुप्त के आने की सूचना दी। स्वर्ग में उन्हें रहते सदियां बीत चुकी थीं । चंद्रगुप्त पास के प्रांगण में रहते थे, पूर्व में जब कभी उनका गुरु से मिलने का मन होता तो सूचना आ जाती, आखिरकार वह पाटलिपुत्र के पूर्व सम्राट थे । मिलने पर वे दर्शन, साहित्य और राजनीति की चर्चा करते, कुछ पुस्तकों की भी चर्चा करते। धरती से कभी-कभार ही कोई...
मान मेरा है यह वतन मेरा
मैं रहूं ना रहूं वतन मेरातू रहेगा यही जतन मेराव्यर्थ ही आंधियों से डरते होअमिट एहसास है वतन मेरा। माना हम आज कुछ परेशां हैआज आंखों में कुछ नमी सी हैकल तो अपना है यह गुमाना हैअनगिनत दौरे ऐसे गुजरे हैंऔर निखरा है यह वतन मेरा। मुश्किलों में ही परख होती हैकौन कब तलक हमकदम होगाजब भी कुछ बेबसी का मंजर होफिर से उभरा है यह वतन मेरामान मेरा है यह वतन मेरा। कौन कहता है चांद चलता हैकौन कहता है गुलों में रंग...
चल उड़ जा रे पंछी
सितंबर का महीना दो दिन पहले शुरू हुआ था। कुलपति महोदय के आदेशानुसार महाविद्यालय सभागार में छात्र छात्राओं को नई शिक्षा नीति से परिचित कराया जा रहा था। प्राचार्य मकरंद त्रिपाठी एवं प्रोफेसर नवनीत सिंह कुछ फाइलें लेकर मंच पर आसीन थे। वह आपस में नई शिक्षा नीति के अंग्रेजी संस्करण को सामने रखकर कुछ चर्चा कर रहे थे। अंग्रेजी संस्करण के कारण उन्हें उसे ठीक से समझने में बड़ी दिक्कत हो रही थी परंतु उनके...
दीपक
वह दीपक मुझे बुलाता हैविकराल तिमिर के बिंब बीचमुझको लड़ना सिखलाता हैवह मुझमें आस जगाता हैवह दीपक मुझे बुलाता है। कैसे एक जरा सी लौलड़ती घनघोर अंधेरे से?दृढ़ निश्चय की बाती परअपने कदम टिकाता हैवह दीपक मुझे बुलाता है। मुझमें है उसका अंश कोईमेरा उससे संबंध कोईजब स्वप्नों का हो अनस्तित्ववह मुझमें स्वप्न जगाता हैवह दीपक मुझे बुलाता है। निश्चित है लड़ना होगा हीजब भी कोई निःशब्द हुआकोई बेड़ी में जकड़ा...