बीत गई रात रीआ गई यायावरीआज यहां कल वहांफक्कड़ों का राज री।
जिंदगी में आ गईअलग सी एक रास रीबंधनों से मुक्त जैसेहो रही मन की लड़ी।
ह्रदय में उल्लास जैसेवसंत का हो राग रीलेखनी भी मस्त होकरलिख रही जिंदादिली।
समय में बदलाव कीछा गई है ताजगीआज जाना मैंने खुद कोरोज ही नव गान री।