अग्निपथ पर अटल रह हुंकार करजो भी आए सामने स्वीकार करकोई आग्रह या किसी याचना क्यामहाभारत सज गया है युद्ध कर। बहुत तुमने संस्कृति का भान रखाबहुत तुमने बंधुता का मान रखादूत भेजा शांति का प्रस्ताव रखाशत्रु पर अब अस्त्र का संधान कर। शिविर में विश्राम अब तू त्याग देवीर है तू युद्ध पर अब ध्यान देछोड़ कर निज हानि की चिंता सदालक्ष्य को अब ध्यान में अपने लगा। भूल जा संग्राम के परिणाम कोयाद तू अपने कुल के...
वेलकम टू पाटलिपुत्र
चलिए आज आपको कुछ पुराने दिनों से परिचित कराता हूं। पाटलिपुत्र से तो आप समझ ही गए होंगे कि मैं अपने प्रिय राज्य की बात कर रहा हूं क्योंकि यह नाम वहीं से संबंधित है, हां विरोधी पार्टी वाले कभी-कभी इसका नाम जंगलराज से जोड़ देते हैं, यह और बात है। जंगल में मंगल करना कोई हमसे सीखे, और इसके कुछ उदाहरण भी मैं आपको देता हूं। उस दिन मैं अपने गांव से बनारस जाने के लिए निकला था। गांव से थोड़ी दूर एक अन्य...
हिन्दी
मैं हिन्दी हूं, मैं हिन्दी हूंमैं भारत मां की बिंदी हूंजो सदा सुशोभित वसुधा परमैं शब्दों की कालिंदी हूं।
है ओज रहा परिचय मेराहै जोश सदा सहचर मेरामैं जिह्वा की आनंदी हूंमैं हिन्दी हूं, मैं हिन्दी हूं।
मैं भावों का सुंदर संयोजनभारत का ऊर्जित संबोधनसंस्कृतियों की मैं संधि हूंमैं हिन्दी हूं, मैं हिन्दी हूं।
जीये भोजपुरिया हो
जीयेs भोजपुरिया हो, जीयेs हो पुरबियाबसs चाहे जाई कौनो देशsआपन ई बोलीया भुलईहs न कबो रामाकेतनो अलग परिवेश। माटी के रंगवा रंगाइल ई बोलिया होमहके जा के हर देसडांटि के जो बोले केहू तबो लागे मीठे मीठतनिको लागे नाहिं ठेस। होलिया दिवलिया में गाईं भोजपुरियालागेला पुरबिये के तानमनवां में लागे जैईसे एही में जीनगीएही में सांझि आ बिहान। हमके त लागे जईसे एही में पीपरएही में कोईलिया के बानएही में ऊ सरसो पियर...
दीपक
वह दीपक मुझे बुलाता हैविकराल तिमिर के बिंब बीचमुझको लड़ना सिखलाता हैवह मुझमें आस जगाता हैवह दीपक मुझे बुलाता है। कैसे एक जरा सी लौलड़ती घनघोर अंधेरे से?दृढ़ निश्चय की बाती परअपने कदम टिकाता हैवह दीपक मुझे बुलाता है। मुझमें है उसका अंश कोईमेरा उससे संबंध कोईजब स्वप्नों का हो अनस्तित्ववह मुझमें स्वप्न जगाता हैवह दीपक मुझे बुलाता है। निश्चित है लड़ना होगा हीजब भी कोई निःशब्द हुआकोई बेड़ी में जकड़ा...