राजा विक्रमादित्य के देहावसान के बाद सदियां बीत चुकी थीं पर भारत में उनके द्वारा स्थापित की गई राज्य व्यवस्था अभी भी वैसे ही चल रही थी । उनके सिंहासन की बत्तीस पुतलियां अभी भी सिंहासन में जड़ी हुई थीं और उनके लिए राजा की परीक्षा लेना रूटीन कार्य हो चुका था। राजा आते, जाते, फिर नए आते, सदियों से यही चल रहा था। उनके मन मस्तिष्क में धीरे धीरे एक उदासी ने घर बना लिया था। हां, नए राजा के आने के पश्चात...
मंडूक स्तवन
कल स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्र सागर पांडेय के एक प्रश्न ने मुझे चौंका दिया। उसने पूछा, “सर, लॉर्ड मैकाले की मिनट तो अठारह सौ पैंतीस की है, फिर आज भी लोग उस को बुरा भला क्यों कहते हैं, क्या वह अभी भी कोई भूमिका निभा कर रहा है अपनी शिक्षा नीति में?” अचानक पूछे गए प्रश्न से मैं थोड़ा चिंतित तो हुआ लेकिन मुझे उसकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए कुछ तो कहना था। अतः मैंने उससे कहा, “अब यह सवाल...