Categoryशायरी

रिश्ते

अब कोई मेहमान रुक नहीं पाताझट से आता है चला जाता है।

अभी तो पुरसाहाल भी न पूछा मैंनेफिर आऊंगा, नहीं है वक्त सुना जाता है।

समय की भेंट चढ़े सब रिश्ते मेरेजिंदगी रेत के मानिंद फिसल जाती है।

दिल हो गए अब दूर कि तलबगारी मेंउनका आना भी एक जख्म लगा जाता है।

मैं भी हूं, वे भी है, सब कुछ तो है दुनिया मेंमेरा घर खाली है, खाली ही रह जाता है।

ग़ज़ल

तुम ग़ज़ल बन गई हो हमारे लिएगुनगुनाता जिसे मैं हूं हर पल प्रियेलिखता मैं जो भी तुम्हें सोचकरतुम शग़ल बन गई हो हमारे लिए। मधुप बन तलाशा करूं मैं जिसेतुम कमल बन गई हो हमारे लिएछुअन तेरी शीतल घनी छांव सीचांदनी बन गई हो हमारे लिए। तुम चमन बन गई हो हमारे लिएपुष्प कलियां जहां मुस्कुराती मिलेंकहकशां बन गई आसमां में जहांखो गए जिसमे तारे हजारों प्रिये। तुम जतन बन गई हो हमारे लिएबंध गई है प्रणय डोर तुमसे...

मिठास

वह खत जो तुमने कभी लिखे थेन जाने अब वह कहां धरे हैं?इतने बरसों के बाद हम भीन जाने किस वहमो-गुमां पड़े हैं? तुम अगरचे मिल जो जातेतो पूछते खत में क्या लिखा था?उन मौसमों के रंग क्या थेखिले थे डालों पर फूल कैसे? भुला दिया है हमने कैसेलम्हे जो इतने अजीज मुझको?सोचता हूं अब भी लौट जाऊंउस जगह जहां तुम मुझे मिले थे। जिन रास्तों पर हम चले थेउन रास्तों का क्या बना हैवह दरख़्त क्या हैं अब भी वैसेया वह सिमटकर...

सियासत

आज तेरी बातों में सियासत है बहुततभी एहसासों में बनावट है बहुत मैं तो अब भी होश मंद रहता हूंआज भी वक्त किताबों में गुजारा है बहुत। दो कदम तो चलो, हम चार कदम चल देंगेआज फिर जगने का इरादा है बहुत। चुपचाप खड़े रहने से अच्छा है मेरा मर जानावैसे भी जिंदगी में आज खतरा है बहुत। मैं तो बस ठोकर से हर दीवार गिरा डालूंआज इन दीवारों में शीशा है बहुत। जूझना होगा ही आज सोचा है बहुतअब तलक तो हमने बचाया है बहुत।...

गवारा न था

झूठ के साथ चलना गवारा न थाउसके जलसे में कोई हमारा न था। जिगर पर नए घाव फिर से हुएहमें आह भरना गवारा न था। वह कब तक चलेगा यूं ही शान सेउस महकमे से रिश्ता हमारा न था। हमने देखा बहुत झूठ की फ़र्द कोपर सबूतों का कोई सहारा न था। वह कागज की कश्ती कहां जाएगीउसने सच को कहीं भी पुकारा न था। झूठ की हरकतें बढ़ गई आजकलउसकी ज़िंदाँ में मेरा गुजारा न था। सुबह होगी मगर लोग पछता रहेझूठ को वक्त रहते सुधारा न था।...

इंतजाम

शक-ओ-शुबहा पनप रहे हो जहांवहां जाने का दिल नहीं करताहोश की मिल्कियत को अबदिल लगाने का जी नहीं करता। कोई भी बच नहीं सकताइस माहौल की मक्कारी सेजहां पर सच के दावेदारों मेंतरफदारी हद से ज्यादा है। अब चेहरे साफ नहीं दिखतेजो कभी आईने से लगते थेआज हक के तलबगारो मेंनाउम्मीदी हद से ज्यादा है। साहिबे-दरबार अब हम परकुछ मेहरबान हद से ज्यादा हैमेरा कलाम मुझसे कहता हैयहां अंधेरा हद से ज्यादा है। जो भी हो अंजाम...

मिठास

वह खत जो तुमने कभी लिखे थेअब न जाने कहां धरे हैं?इतने बरसों के बाद हम भीजाने किस वहमो-गुमां पड़े हैं? तुम अगरचे मिल जो जातेपूछते खत में क्या लिखा था?उन मौसमों के रंग क्या थेखिले थे डालों पर फूल कैसे? भुला दिया है हमने कैसेलम्हे जो इतने अजीज मुझकोकि अब जो सहसा लौट जाऊंउस जगह कुछ बचा नहीं है। जिन रास्तों पर हम चले थेउन रास्तों का क्या बना है?वह दरख़्त क्या हैं अब भी वैसेया वह सिमटकर ठूंठ से है? जो...

ऐ जिंदगी

ऐ जिंदगी, दो चार कदम साथ तो चलहोने दे उनसे अभी और मुलाकात तो चल। अभी-अभी तो उनके पास आकर बैठा हूंखुल जाएं जरा ठीक से जज्बात तो चल। मिले हैं इतने बरस बाद कि अब याद नहींहो जाए जरा शाम से अब रात तो चल। अभी तो आए है यादों के चंद झोंके हीहो जाए जरा आंखों से बरसात तो चल। हमारे प्यार का मधुमास अभी आया हैहो जाए उन्हें ठीक से एहसास तो चल। यही वक्त है अब दिल के जवां होने काउनकी खुशबू में मुझे और रवां होने...

मलाल

कितने चले गए, कितने बिछड़ गएयह मलाल रह गया, कि गले न लग सकेइस राह चलते चलते, कई हमसफर मिलेयह मलाल रह गया, कि अपने न बन सके। कितनों के साथ अपनी कुछ रंजिशें रहींयह मलाल रह गया, न मसले सुलझ सकेफिर से अगर जुड़े भी बरसों से टूटे रिश्तेयह मलाल रह गया, कि वैसे न रह सके। कितने हसीन पल भी आ कर निकल गएयह मलाल रह गया, क्यों ना संजो सके?वह पल कभी न लौटा, जो आकर गुजर गयायह मलाल रह गया, कि हम देखते रहे। अपनी...

ये और बात है

ये और बात है कि मैं कुछ नहीं कहता तुमकोइस नए शौक के कुछ तो मायने होंगे।

लोग मजमून जान लेते थे कभी लिफाफे सेतुम कौन सुखनवर हो की अंजान बने रहते हो?

वह भी एक दौर था जब दिलों पर ताले कम थेअब गुजारिश है कि हवा को तो हवा रहने दो।

नशे का वक्त है शायद होश कहां अब मुमकिनयह मेरी जिद है कि पहचान बनी रहती है।

मेरी जुबान तू सच कहने में डरती क्यों हैतोहमत ए दाग से तो चांद भी न बच पाया है।

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Prof. Vachaspati Dwivedi teaches English in Sant Vinoba P.G. College, Deoria, U.P. India. He is a PhD from India's reknowned University BHU, Varanasi with a first class Post-graduate degree. His foreign tenures took him to teach in Haramaya University, Ethiopia and Al Fateh University Tripoli, Libya. He has 8 books to his credit and more than 30 papers published in different journals, both national and international. In 2012 he presented a paper on Folk Literature in Bangkok International Conference , Thailand and in Feb 2019 he went to Singapore to present a paper on Hijra Autobiographies. He edits an international online journal 'Critical Paradigm' which can be accessed at www.criticalparadigmjournal.com.
He is an acclaimed poet of Hindi as well and has published three poetry collections namely 'Ret ke Sahar Me', 'Phir Khilenge Fool Priytam' and 'Jindagi Jo Shayari Hoti'. Recently his story collection 'Apna Apna Moksh' (2024) has been published worldwide and is available on Amazon and Flipkart.