चाणक्य अपने कक्ष में विश्राम कर रहे थे तभी अनुचर ने उन्हें उनके शिष्य चंद्रगुप्त के आने की सूचना दी। स्वर्ग में उन्हें रहते सदियां बीत चुकी थीं । चंद्रगुप्त पास के प्रांगण में रहते थे, पूर्व में जब कभी उनका गुरु से मिलने का मन होता तो सूचना आ जाती, आखिरकार वह पाटलिपुत्र के पूर्व सम्राट थे । मिलने पर वे दर्शन, साहित्य और राजनीति की चर्चा करते, कुछ पुस्तकों की भी चर्चा करते। धरती से कभी-कभार ही कोई...
चल उड़ जा रे पंछी
सितंबर का महीना दो दिन पहले शुरू हुआ था। कुलपति महोदय के आदेशानुसार महाविद्यालय सभागार में छात्र छात्राओं को नई शिक्षा नीति से परिचित कराया जा रहा था। प्राचार्य मकरंद त्रिपाठी एवं प्रोफेसर नवनीत सिंह कुछ फाइलें लेकर मंच पर आसीन थे। वह आपस में नई शिक्षा नीति के अंग्रेजी संस्करण को सामने रखकर कुछ चर्चा कर रहे थे। अंग्रेजी संस्करण के कारण उन्हें उसे ठीक से समझने में बड़ी दिक्कत हो रही थी परंतु उनके...