वह खत जो तुमने कभी लिखे थेअब न जाने कहां धरे हैं?इतने बरसों के बाद हम भीजाने किस वहमो-गुमां पड़े हैं? तुम अगरचे मिल जो जातेपूछते खत में क्या लिखा था?उन मौसमों के रंग क्या थेखिले थे डालों पर फूल कैसे? भुला दिया है हमने कैसेलम्हे जो इतने अजीज मुझकोकि अब जो सहसा लौट जाऊंउस जगह कुछ बचा नहीं है। जिन रास्तों पर हम चले थेउन रास्तों का क्या बना है?वह दरख़्त क्या हैं अब भी वैसेया वह सिमटकर ठूंठ से है? जो...